Breaking News
  • राम मंदिर मामले में SC कोताही बरत रहा है- CM योगी के मंत्री धर्मपाल का बयान
  • रेवाडी: पुलिस टीम पर बदमाशों का हमला, सब इंस्पेक्टर की मौत
  • सबरीमाला: निलक्कल, पंबा में धारा-144 लगाई गई
  • लखनऊ: पुलिस लाइन में सीएम योगी का औचक निरीक्षण

रुक सकती है नरेंद्र मोदी की बुलेट ट्रेन परियोजना: हाईकोर्ट पहुंचा मामला!

सूरत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी अहमदाबाद मुंबई परियोजना पर बड़ा घमासान छिड़ गया है। इस परियोजना को लेकर सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण करने के मामले को लेकर किसानों ने हाईकोर्ट का रुख किया है। जिसपर हाईकोर्ट में सोमवार से सुनवाई शुरू हो रही है।

बतादें कि पीएम नरेंद्र मोदी की अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना खटाई में पड़ चुकी है। इस परियोजना को लेकर सूरत के किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू करने के साथ ही कोर्ट का भी रास्ता अपनाया है। राज्य में बुलेट ट्रेन परियोजना के नाम पर सरकार द्वारा की जा रही जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई को तानाशाही और असंवैधानिक बताते हुए किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। बताया जा रहा है बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण के तरीकों के खिलाफ किसानों की ओर से चार याचिकाएं लगाई गयी है। जिसके बाद अब यह मामला नरेंद्र मोदी के लिए उन्ही के राज्य में पेचीदा हो गया है।

अभी अभी: मुठभेड़ में कई आतंकी ढेर, राज्यपाल ने भी लिया बड़ा फैसला

 

इससे पहले किसानों ने जमीन अधिग्रहण को लेकर आन्दोलन भी शुरू कर दिया था। गुजरात के सूरत में किसानों ने सरकार की जमीन अधिग्रहण की नीति पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन कर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा था। बीते सोमवार और मंगलवार को सूरत जिले के किसान सड़कों पर उतरकर इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सूरत जिले के 15 गांवों के सैकड़ों की संख्या में जिला मुख्यालय पहुँच कर लोगों ने सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण के तरीकों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए मनमाने तरीके से जमीन देने से साफ़ इनकार कर दिया। किसानों ने जिला प्रशासन को 14 आपत्तियां दर्ज कराई थी। लेकिन अब सरकार की जमीन अधिगृह नकी नीति के खिलाफ किसानों ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सपा-बसपा के गठजोड़ से बेचैन हैं बीजेपी के चाणक्य, कही बड़ी बात?

किसानों द्वारा हाईकोर्ट में चार याचिकाएं लगाते हुए कहा है कि, सरकार ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए और असम्वैधिनिक तरीके से उनकी जमीन को अधिग्रहित कर रही है। वहीँ किसानों ने सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को भी रद्द करने की मांग की। दरअसल किसानों का आरोप है कि सरकार ने बिना जमीन की कीमत आंकलन और समीक्षा किये अधिसूचना जारी कर दी है। किसानों ने कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के खिलाफ जाकर काम कर रही है।

वहीँ हाईकोर्ट ने भी किसानों की याचिका को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति वीएम पंचोली की खंडपीठ ने सरकार के वकील को सरकार से निर्देश लेने का आदेश दिया। किसानों की याचिका पर सोमवार से सुनवाई शुरू होगी। आपको जानकारी के लिए बतादें कि नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य 2022 का है, लेकिन अभी पीएम मोदी के गृहराज्य में ही जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सकी है। सूरत के 140 हेक्टेयर जमीन से निकलने वाली इस परियोजना के खिलाफ 21 गांवों के लोग खड़े हो गये हैं। वहीँ महाराष्ट्र में भी किसानों ने जमीन देने से मना कर दिया है।

यह भी देखें- 

loading...