Breaking News
  • चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट में आज चार नए जजों को दिलाई शपथ

9 साल बाद खुला RTI कार्यकर्ता के मर्डर का रहस्य, परिजनों को मिला न्याय

पल्लवी शर्मा

RTI के कार्यकर्ता अमित जठेजा को 20 जुलाई 2010 में गुजरात के गांधी नगर हाईकोर्ट के बाहर मौत के घाट उतार दिया था। 9 साल से चल रहे इस केस की आज आखरी सुनवाई के बाद अमित जठेजा की आत्मा और उनके परिजनों को न्याय मिला है ।

अमित गुजरात के गिर वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग के खिलाफ आरटीआई लगा रहे थे। इसी दौरान BJP के पूर्व अध्यक्ष दीनू बोघा सोलंकी और उनके साथ सात लोगों ने मौत का षड्यंत्र रचकर गुजरात के हाईकोर्ट के बाहर अमित को गोलियों से छलनी कर दिया। सूत्रों की मानें तो इस केस की छानबीन में पुलिस को सोलंकी के खिलाफ कोई सबूत नही, जिससे उसे छोड़ना पड़ा।

पुलिस के इस रवैये से आरटीआई कार्यकर्ता अमित जठेजा के पिता के मन को शांति नही मिली। उन्हे यह लगता रहा कि उनके बेटे के हत्यारें अभी भी बाहर खुले आम चैन की निंद सो रहे है। वे लगातार बेचैन रहें और एक दिन उन्होंने गुजरात कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद कोर्ट ने गुजरात की सीबीआई को इस केस का जिम्मा दिया। सीबीआई की टीम 9 सालों से इस केस की जड़ को तलाश रही थी। तभी उन्हे यह मालूम पड़ा की दीनू सोलंकी का भतीजा शिवा सोलंकी भी इस हत्या कांड मे शामिल हैं।

इस जड़ के तलाश के साथ ही सीबीआई ने बिना देरी किये इसे कोर्ट के सामने पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने भी इन सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए दीनू सोलंकी और उसके भतीजे शिवा सोलंकी समेत सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।

 

loading...