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फिल्म बनाने के लिए गिरवी रख दिये पत्नी के गहने, ऑस्कर देने घर आये थे आयोजक

मुंबई: बॉलीवुड का वो डायरेक्टर जिसके पास खुद चलकर आया था ऑस्कर अवार्ड। उनका नाम है सत्यजीत रे (राय)। वह पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास ऑस्कर अवॉर्ड खुद आया था। सत्यजीत ने देश में ही नहीं पूरी दुनिया में अपने काम का लोहा मनवा चुके हैं। सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 कोलकाता में हुआ था। वो तीन साल के थे जब उनके पिता सुकुमार राय की मौत हो गई थी। जिसके बाद मां सुप्रभा को उनकी परवरिश करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

सत्यजीत ने 1943 में ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम किया था। उस दौरान उन्होंने कई मशहूर किताबों का कवर डिजाइन किया था जिसमें जिम कार्बेट की मैन इट्स ऑफ कुमाऊं और जवाहर लाल नेहरु की डिस्कवरी ऑफ इंडिया शामिल है। साल 1950 में रे को अपनी कंपनी के काम से लंदन जाने का मौका मिला। वहां पर उन्होंने कई फिल्में देखी।

भारत वापस लौटने के बाद सत्यजीत ने तय कर लिया था अब वो पाथेर पांचाली पर फिल्म बनाएंगे। 1952 में सत्यजीत रे ने एक नौसिखिया टीम लेकर फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी। एक नए फिल्मकार पर कोई दांव लगाने को तैयार ही नहीं था औऱ खुद के पास जितने पैसे थे फिल्म में लगा डाले यहां तक कि उन्होंने पत्नी के गहने जेवर तक गिरवी रख दिए।

साल 1992 में सत्यजीत रे को ऑस्कर देने की घोषणा की गई लेकिन उस दौरान वो बहुत बीमार थे। ऐसे में ऑस्कर के पदाधिकारियों ने फैसला लिया कि ये अवॉर्ड उनके पास पहुंचाया जाएगा। पदाधिकारियों की टीम कोलकाता में सत्यजीत रे के घर पहुंची और उन्हें अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके करीब एक महीने के भीतर ही 23 अप्रैल 1992 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनका निधन हो गया।

फिल्म जगत में उनके योगदानों को देखते हुए उन्हें 1965 में पद्म भूषण, 1985 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 1992 में भारत रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। जबकि इसके अलावा भी फिल्मी दुनिया और साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुलनिय योगदानों के लिए फिल्म फेयर व अन्य कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

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