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दादासाहब फाल्के अवॉर्ड विनर दिग्गज की मौत, फिल्मी दुनिया में छाया मातम

नई दिल्ली: देश के जाने-माने दिग्गज फिल्म निर्देशक मृणाल सेन का रविवार को निधन हो गया। 95 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले मृणाल सेन दादासाहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किए जा चुके है। फिल्मी दुनिया से जुड़े इस सबसे बड़े सम्मान की चाहत हर फिल्मी कलाकार के मन में होती है।

लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की जद में चल रहे मृणाल सेन का निधन कोलकाता स्थित उनके आवास पर हुई है। भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध निर्मात-निर्देशकों में से एक मृणाल सेन की अधिकांश फिल्में बांग्ला भाषा में हैं। उन्होंने साल 1955 में पहली फीचर फिल्म 'रातभोर' बनाई थी, जिसके बाद उन्हें 'नील आकाशेर नीचे' फिल्म ने खास पहचान दिलाई।

इसके तुरंत बाद मृणाल सेन की तीसरी फिल्म 'बाइशे श्रावण' आई, जिसने उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। मृणाल सेन ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के साथ साल 1977 में 'मृगया' नाम की एक फिल्म बनाई थी, यह फिल्म मिथुन की पहली फिल्म मानी जाती है और पहली ही फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती को बेस्ट एक्टर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

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