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संजय दत्त का घिनौना सच जो संजू फिल्म में छिपाया गया

मुंबई:- संजय दत्त की लाइक और बॉलीवुड करियर किसी भी एक्टर से नहीं मिनती जुलती है। जहां एक टाइम उन्हें नशेड़ी कहा जाता था तो एक बार उनपर देशद्रोही का आरोप भी लगा। संजू की लाइफ एक फिल्म के जैसी ही रही, जहां रोमांस, इमोशन, एक्शन सबकुछ देखने को मिला।

इस खबर में हम आपको संजू से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे, जो हाल ही में रीलिज हुई उनकी बॉयोपिक फिल्म संजू में नहीं बताया गया।

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नरगीस औऱ सुनिल दत्त जब माता पिता बनने वाले थे, तो उन्होंने एक मैगजिन में एड दिया, जिसमें लड़का औऱ लड़की के लिए नाम बताना था। कई नाम देखने के बाद नरिगस को संजय नाम बहुत पसंद आया। इसके बाद उन्होंने तय किया कि अगर उन्हें लड़का हुआ तो वो उसका नाम संजय रखेंगी।

2013 में जब संजू ने जेल जाने के लिए सरेंडर किया तो उन्हें जैल कैदियों की तरह काम मिला। संजय को ये काम करने के बदले उन्हें एक दिन में 50 रुपये मिलते थे।

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2016 को जब संजय को जेल से रिहा किया गया। तो उनकी कुल कमाई 31,000 हो चूकी थी। जिसे उन्होंने जेल के कैटिन में ही खर्च कर दिय थे। जेल से बाहर आते वक्त उनका बकाया 430 रुपये था, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी मान्यता को दे दिया था।

संजय ने अपनी जिंदगी में 2 फिल्मफेयर अवार्ड जिता था। एक तो उन्होंने फिल्म वास्तव के लिए जिता था। दूसरा उन्होनें फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस की लिए जिता था।

संजय अपनी पहली फिल्म रॉकी के समय ही नशे किया करते थे। उनकी ये लत इतनी ज्यादा थी शूटिंग के जाते वक्त फ्लाइट में अपने जुतें में ड्रग्स छुपा दी थी।

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संजय ने पहली सिग्रेट 9 साल की उम्र में पी थी। ये आदत उनकों अपने पिता सुनिल दत्त की वजह से लगी थी। उनके पिता जब भी अपने दोस्तों के साथ बैठते थे तो सिग्रेट पिते थे। संजय ने एक दिन कोशिश की औऱ उन्हें सिगरेट की आदत लग गई।

संजय को बिगड़ता हुआ देख उनके पिता ने उऩ्हें बोर्डिंग स्कूल भेजने का फैसला कर लिया था। ये सलाह उन्हें इंद्रा गांधी ने दी थी, क्योंकि उन दिनों सुनिल कांग्रेस के एक्टिव मेमबर थे। इसके संजय को वहां भेज दिया गया, औऱ संजय ने वहां 9 साल बिताए।

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