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UP: सरकार के इस आदेश के बाद 82 महिला टीचर हो गईं प्रेगनेंट!

लखनऊ: देश के सबसे बड़े प्रदेश की योगी सराकर में महिलाओं और बेटियों के साथ रेप और अन्य तरह के अपराधों पर नकेल कसने के लिए एक के बाद एक कड़े फैसे कर रही है, हालांकि इस राह में सरकार के लिए कई रोड़े हैं, जिसके कारण सरकार अपने इस तरह के अपराधों पर पूर्ण तैर पर नकेल नहीं कस पा रही है।

वहीं प्रदेश में शिक्षा की लचर वयस्था भी सरकार की कार्यप्रणालियों पर सवालिया निशाना लगाते हैं। जबकि इधर प्रदेश कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस नए मामले को जानकार सरकार भी हैरान है। दरअसल, मामला कुछ यू है कि अंतर जनपदीय ट्रांसफर को लेकर कई महिला शिक्षकाओं को यहां से वहां भेजा जा रहा है।

खबरों के अनुसार पिछले दिनों 410 महिला और 5 पुरुष शिक्षकों को अंतर जनपदीय ट्रांसफर के तहत बरेली भेजा गया। जिसके बाज काउंसलिंग हुई और सभी टीचरों के लिए स्कूल भी आवंटित कर दिए गए। बताया जाता है कि नियमों के तहत इन शिक्षकों की तैनाती दूरदराज के उन स्कूल में की कई जहां टीचरों का कमी थी।

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लेकिन घर या अपने क्षेत्र से दूर के स्कूलों में तैनाती होते ही टीचरों के बीच नजदीक के स्कूल में तैनाती कराने की जंग छिड़ गई। इस क्रम में खास कर महिला शिक्षकों ने कई तरह के कारण बता कर नजदीक के स्कूल में तैनाती के संबंध में आवेदन दिए हैं। इस क्रम में कुछ महिलाओं ने अपनी सिफारिश नेताओं से भी कराए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बदलने के सम्बंध में अब तक करीब 250 आवेदन बीएसए दफ्तर में आए हैं, जिनमें से सबसे अधिक 82 महिला शिक्षकों ने अपने आप को गर्भवती बताते हुए पास के स्कूलों में तैनाती की मांग की है। वहीं कुछ महिलाओं ने कई ऐसी महिला शिक्षक हैं जिन्होंने अपनी रीढ़ सम्बन्धी परेशानियों का हवाला देते हुए अपनी तैनाती पास के स्कूल में करने की मांग की है।

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वहीं इस पूरे मामले को लेकर बीएसए तनुजा मिश्रा ने बताया कि, कोई भी टीचर दूर के स्कूल में जाना नहीं चाह रेह, ऐसे में वहां कैसे पढाई होगी। उन्होंने कहा कि 60 फीसदी महिलाओं ने तो गर्भवती होने का हवाला दिया है जिन्नें बहानेबाज ज्यादा लग रहे हैं। ऐसे में पहले इनकी पहचान की जाएगी और फिर इस मामले में आगे का फैसला होगा। उन्होंने कहा कि जिनकी परेशानियां सही होगी उनके साथ मानवीय आधार पर फैसला लिया जाएगा।

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