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इस आंदोलन में ‘गांधीजी’ ने ऐसा काम किया कि दुनिया के लिए हीरो बन गए

नई दिल्ली: आज 9 अगस्त 2017 को देश भर में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं सालगिरह मनाया जा रहा है। इस अवसर केंद्र की मोदी सरकार ने संसद में विशेष सत्र बुलाया है जहां संसद सदस्य अपने अपने विचार साझा कर रहे हैं। साल 1942 को आज के ही दिन 9 अगस्त को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आह्वान पर देश भर में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

भारत छोड़ो आंदोलन देश की आजादी लड़ाई के लिए दो बड़े आंदोलनों में से एक है। आजादी लड़ाई में सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर 1857 का स्वतंत्रता संग्राम के बाद दूसरा सबसे बड़े आंनदोलन के तौर पर भारत छोड़ो आंदोलन को जाना जाता है। भारत को जल्द और संपूर्ण आजादी दिलाने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा अंग्रेज शासन के खिलाफ यह एक बड़ा 'जन अवज्ञा आन्दोलन' था।

'क्रिप्स मिशन' की असफलता के बाद गाँधी जी ने एक और बड़ा आंनदोलन छेड़ने का निश्चय लिया था, जिसे ‘भारत छोड़ो आंनदोलन' का नाम दिया गया। बताया जाता है कि आजादी के लड़ाई के लिए लड़ी गई लड़ाई में से आखिरी सबसे बड़ी लड़ाई था ‘भारत छोड़ो आंनदोलन लन', जिसने अंग्रेस शासन को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था।

क्रिप्स मिशन के खाली हाथ भारत से वापस जाने पर भारतीयों को इसका अहसास हुआ और दूसरी ओर दूसरे विश्वयुद्ध के कारण हालात और भी गंभीर होते जा रहे थे। इस दौरान जापान सिंगापुर, मलाया और बर्मा पर कब्जे के बाद भारत की ओर बढ़ने लगा, उधर युद्ध के कारण तमाम वस्तुओं के कीमत बेतहाश बढ़ रहे थे, जिससे अंग्रेज शासन के खिलाफ भारतीयों में व्याप्त आक्रोश दिखने लगा।

जापान के बढ़ते हुए प्रभुत्व को देखकर 5 जुलाई, 1942 को गाँधी जी ने हरिजन में लिखा "अंगेज़ों! भारत को जापान के लिए मत छोड़ो, बल्कि भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप से छोड़ जाओ।" इस आंनदोलन के दौरान कांग्रेस के ऐतिहासिक सम्मेलन में महात्मा गाँधी ने लगभग 70 मिनट तक भाषण दिया।

उन्होंने अपने भाषण में कहा, "मैं आपको एक मंत्र देता हूँ, करो या मरो, जिसका अर्थ था- भारत की जनता देश की आजादी के लिए हर ढंग का प्रयत्न करे। क्योंकि गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे, ऐसे में उसकी यह बात ‘करो या मरो’ सुन कर काफी लोगों को हैरानी हुई, लेकिन इसके बाद से ही गांधी जी की मेहनत रंग लाने लगी और इस समय तक आंग्रेजों के पांव उखड़ने शुरू हो गए थे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया जारी रही और 15 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत की आजादी का ऐलान कर लिया गया।

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