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ये खबर नहीं वॉर्निंग है! पर्यावरण से खेलने वालों... आगे आग ही आग है!

नई दिल्ली: 5 जून को हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इस खास अवसर पर देश-दुनिया भर में कई तरह के खास कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों द्वारा आयोजित प्रर्यावरण से संबंधित कार्यक्रमों में जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और पर्यावरण को बेहतर बनाने का संदेश दिया। पेश है पर्यावरण दिवस पर एक खास रिपोर्ट...

असल में यह एक खबर नहीं बल्कि वॉर्निंग है, आंख खोल कर देखिए, कान खोल कर सुनिए और चिल्ला-चिल्ला कर लोगों को बताइए कि अब वो दिन दूर नहीं जब पूरा भारत आग के गोले में तब्दिल हो जएगा। जीवन जीना उम्र कैद के समान होगा, आप चैन से मर भी नहीं सकेंगे! पूरी दुनिया बेचैन होगी। ये बातें आपकी घबराहट बढ़ा सकती है, लेकिन इसी बढ़े हुए घबराहट के साथ इसे समझिए और देखिए ये पूरी रिपोर्ट।

स्कूल जाने वाले बाल-बालाएं, सब्जी लेने निकली अम्मा, स्कूल से लौट रही मैडम सब बेचैन हैं। जून के महीने में पूरा हिंदुस्तान सूरज की तपिश में तप रहा है। राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान 50 के पार है। लोगों का जीना दुश्वार है। पूरा शहर रेगिस्तान बन गया है। सड़कें विरान हो चली है...दूर-दूर तक न परिंदा न परिंदे की जात... कहीं कुछ मजबूर लोग घर से निकल भी गए तो तपती गर्मी और झूसला देने वाली हवाओं से लड़ते हुए जूस और शरबत में चैन ढूंढ रहे हैं।

गर्मी का आलम है कि मौसम विभाग की ओर से रेड अर्ट जारी किया है, यानी मजबूरी हो तभी घर से निकले, बाहर लू चल रही है, जो आपको झूलसा सकती है! ये तो हुआ गर्मी का आलम, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर हिंदुस्तान में इतनी गर्मी आई कहां से....आइए यहां एक और रिपोर्ट पढ़िए। सिर्फ देखिए नहीं गौर से समझिए, देखिए और इसे अमल में लाइए। वरना कहीं देर न हो जाए।

घर से फ्रेश हो कर ऑफिस के लिए निकले, लेकिन शर्ट का क्रीच रास्ते में ही उतर गया। सीर से पांव तक पसीने में डूब गए। ऐसा इसलिए हो रहा है। क्योंकि हम सब ने घोर लापरवाही की है। हम सभी लोगों ने कभी न कभी, किसी न किसी परिस्थिति में, अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण के पैमाने से खिलवाड़ किया है, जिसका कारण हा कि हर साल सूरज की तपिश बढ़ती ही जा रही है।

जानकारों की माने तो अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब धरती पर सूरज का ताप और अधिक होगा, तब जीवन दुर्लभ होगा। इंसान, पशु-पक्षी, सब की बेचैनी बढ़ जाएगी।

हिंदुस्तान में सूरज की बड़ती तपिश का सबसे बड़ा कारन पेड़ों की कमी है। जिसपर समय रहते नजर नहीं पहुंची तो जिंदगी तबाह हो सकती है, न घर में कोई मुन्ना रहेगा और न आंगन के कोने में खिलाने वाली दादी। सब गर्मी की भेट चढ़ जाएंगे। ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ो की संख्या उंट के मुंह में जीरे के समना है।

इसलिए यह जरूरी है कि स्वार्थ के लिए जंगल काटने के बजाय पेड़ लगाने पर जोर दें। अगर आपकी इच्छा नहीं है तो धरती पर जीने के बदले टैक्स रूपी 5 पेड़ ही लगा दें...क्योंकि हालात काफी खराब हो चले हैं, खास तौर पर भारत की स्थिति बद से बदतर हैं। समझने के लिए एक और रिपोर्ट देखिए, जिसे गहन रिसर्च के बाद तैयार किया गया है।

सबसे पहले एक ही किस्म के दो सवाल। पृथ्वी पर कितने पेड़ हैं? और इसमें हिंदुस्तान की क्या भूमिका है। इसका जवाब सुन सकेंगे तो सुनिए। इस मामले में हम धरती छू रहे हैं...दरअशल, विश्व भर के 38 शोधकर्ताओं की एक टोली ने काफी सोच-विचार कर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसके हवाले से पता चलता है कि दुनिया भर में करीब 30 खरब पेड़ हैं। अनुमानित आबदी के बाद ये आकड़े प्रति व्यक्ति 422 पेड़ पड़ते हैं। जबकि अगर सिर्फ भारत की बात करें तो यहां प्रति व्यक्ति महज 28 पेड़ ही बचे हैं। जिसका असर उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक दिख रहा है।

हालांकि यहां आपके मन को एक सवाल जरूर कचोट रहा होगा की, क्या दुनिया के सभी पेड़ों कि गन्ना संभव है। आइए एक रिपोर्ट देखिए...जवाब सामने होग...दरअसल, शोधकर्ताओं ने पोड़ों की गन्ना के लिए तीन प्रमुख तरीके अपनाएं हैं। पहला उपग्रहों से प्राप्त चित्रों की मदद ली है। दूसरा जंगलों की 4,30,000 सूचियों के आधार पर पेड़ों का घनत्व निकाला गया और अंत में कम्प्यूटेशनल तरीके से प्रति हैक्टर में पेड़ों की संख्या की सैद्घांतिक गणना की गई है।

वैसे हमारी ये खास पेशकश यहीं खत्म होती है लेकिन चलते-चलते एक काम का सावल, जबाव के साथ जरूर जानिए।

सवाल...क्या आप जानते हैं पेड़ किसे कहते हैं?

जवाब... पेड़ को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है कि, पेड़ वह वनस्पति है जिसके काष्ठीय तने का व्यास छाती की ऊंचाई, यानी करीब साढ़े चार फीट से अधिक हो। तातपर्य है कि फूल-पत्ती लगाकर जिम्मेदारी से बचने का जुगाड़ तलाशने की कोशिश से बचे हैं और आम-अमरूद-जामुन, जैसे फलदाई पेड़ भी लगाए।

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