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बैंडिट क्वीन: डकैतों ने किया रेप- डाकू से हुआ प्यार

नई दिल्ली:- फूलन देवी ने महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन मिशाल कायम किया। किशोरावस्था में उन्हें दुनिया ने सताया और फिर घरवालों ने भी उन्हें छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बार बार गैंग रेप का शिकार हुई और फिर उन्होंने हाथ में बन्दुक पकड़ लिया और चम्बल को अपना घर बना लिया।  डकैत से राजनेता बनने तक का उनका सफर किसी फिल्म की कहानी से ज्यादा दिलचस्प है ।  

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव गोरहा के पिछड़े जाति में एक गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था। हिम्मती फूलन की शादी उसकी मर्जी के बिना 11 साल की कम उम्र में पुट्टी लाल नाम के बूढ़े आदमी से करवा दी गई। यह शादी उनके अपने ही चहेरे भाइयों ने गांव से उन्हें हटाने के लिए की। दरअसल फूलन में बचपन से विद्रोही प्रवृति थी जिस कारण वह घरवालों से भी बगावत करती थीं।  वह समाज के बंदिशों और पुरुष सत्ता के खिलाफ आवाज उठती थी।

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शादी के बाद फूलन को सेक्सुअल हराशमेंट का शिकार होना पड़ा, उनसे जोर जबरदस्ती से कोई काम नहीं कराया जा सकता था।  यही वजह थी कि उन्होंने अपने पति के खिलाफ आवाज उठाई और पति को छोड़ आकर वापस मैके भाग आईं।  वापस गांव आकर वह पिता के साथ मजदूरी करने लगीं। 

फूलन देवी ने गरीबों का शोषण करने वाले दबंग ठाकुरों के खिलाफ मुहीम छेड़ दी, जिसके बाद उन्हें सामूहिक गैंग रेप का सामना करना पड़ा। मात्र 15 साल की कम उम्र उनके उनकी हिम्मत को तोड़ने के लिए गांव के ठाकुरों ने उनके साथ सामूहिक बलात्कर किया। उन्होंने न्याय के लिए समाज के रसूखदार लोगों के दरवाजे खटखटाएं लेकिन उनकी मदद के लिए कोई सामने नहीं आया।

फूलन इस घटना के बाद काफी टूट चुकी थीं, लेकिन उन्हें दूसरा सदमा तब लगा जब इस घटना के बाद उनके अपनों ने ही उन्हें अपनाने से इंकार कर दिया। उनके घरवालों ने उनसे साफ शब्दों में कहा कि अब तुम हमारे लिए मर चुकी हो।  इस बात का जवाब उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान दिया। उन्होंने कहा था कि हम आखिर क्यों मर जाते ? मेरी क्या गलती थी, जिन्होंने अत्याचार किया वो दोषी थे फिर मैं क्यों मरूं?

इस घटना के बाद फूलन ने दृह संकल्प लिया कि वह किसी भी कीमत पर उन लोगों से बदला लेंगी जिन्होंने उनको प्रताड़ित किया है। अभी वह इस कसमकश से जूझ ही रही थीं कि एक बार फिर से उनके साथ सामूहिक गैंग रेप हुआ। इस बार डैकतों ने गांव में पर हमला किया और फूलन को जंगल उठा ले गए। एक के बाद एक वह यौन हिंसा का शिकार होती रहीं। इस बीच फूलन की मुलाकात विक्रम मल्लाह से हुई और दोनों आकर्षण की डोर में बंध गए। समाज की प्रताड़ना से थक चुकी फूलन ने विक्रम के साथ मिलकर अपना अलग गैंग बनाया।

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फूलन देवी को समाज ने न्याय नहीं दिया और अब वह ताकतवर हो चुकी थीं।  उनके हाथ में बन्दुक था और उनके निशाने पर उनके अपराधी थे, जिन्होंने उनके मासूम मन को रौंदा था। 1981 में वह पूरे देश में चर्चित हो गईं जब उन्होंने 22 सवर्ण जाति के लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हालांकि फूलन ने हमेशा पूछे जाने पर इस घटना में अंजाम देने से इंकार किया। 

अब फूलन देवी आतंक का पर्याय बन चुकी थीं। यूपी और मध्य प्रदेश की पुलिस फूलन देवी को पकड़ने के लिए जी जान से लगी थी और फूलन पुलिस के साथ आंख मिचौली का खेल खेल रहीं थीं, लेकिन इसी बीच उनके प्रेमी विक्रम मल्लाह की मुठभेड़ में जान चली गई, जिसके बाद उनका इकलौता सहारा छीन गया।  ऐसे में जब 1983 में इंदिरा गांधी सरकार ने उनसे आत्मसमर्पण के लिए कहा तो वह तैयार हो गईं। हालांकि इसके लिए भी उन्होंने सरकार के सामने शर्त रखी। उनका शर्त था कि उन्हें या उनके किसी साथी को मृत्युदंड नहीं दिया जाए और सजा 8 साल से अधिक ना हो। सरकार ने फूलन की शर्ते मान लीं।

11 साल तक फूलन जेल में रहीं। 1994 में मुलायम सरकार ने फूलन को रिहा किया और टिकट दिया। दो साल बाद फूलन ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर सीट से लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंच गईं। बचपन घास फुस की झोपडी और जवानी बीहड़ों में गुजरने वाली फूलन ने सांसद बनने के बाद दिल्ली के पॉस इलाके साऊथ दिल्ली अपना घर फूलन पैलेस के नाम से बनवाया। बाद में उन्होंने उम्मेद सिंह नाम के बिल्डर से शादी की और एक विदेशी से लाखों रुपये पाकर उन्होंने अपना घर बसा लिया। 

फूलन को आलीशान जिंदगी जीने का काफी शौक था। सांसद बनने के बाद वह महंगी कार, गहने और  रेशमी साड़ियों में नजर आती थीं। राजनीतिक जीवन से फ्री रहने पर वह एक आम महिला की तरफ गृहस्ती के कामों में हाथ बंटाती थीं।

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एक आम ज़िन्दगी जी वही थी, लेकिन तभी 2001 में शेर सिंह राणा नाम के व्यक्ति ने बदला लेने के उदेश्य से उनके घर पर ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। कहा जाता है राजनीति में फूलन देवी को उभरता हुआ देख कर उनके विरोधियों ने उनकी हत्या करा दी। उनकी हत्या में शामिल होने का आरोप पति उम्मेद सिंह पर भी लगा था। हालांकि यह साबित नहीं हो पाया। 

डायरेक्टर शेखर कपूर ने फूलन देवी के जीवन पर फिल्म बनाई मूवी 'बैंडिट क्वीन’। इस फिल्म को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई। कहा जाता है बाद में उन्होंने इस फिल्म के लिए काफी बड़ी रकम वसूल की और फिल्म रिलीज हुई लेकिन बाद में सरकार ने इस फिल्म पर बैन लगा दिया। वह जब तक राजनीति में रही अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहीं।

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