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बेटे को दे दी 1200 करोड़ की दौलत, आज पाई पाई के लिए मोहताज है RAYMOND के मालिक

MUMBAI:- एक पिता ने ये सोचकर बेटे पर भरोसा किया कि बेटा बूढ़ापे की लाठी बनेगा, लेकिन बेटे ने ले सबकुछ लिया और पिता को पाई पाई के लिए मोहताज कर दिया है। ये कहानी है देश के सबसे बड़े बिजनसमैन रहे रेमंड घराने के मालिक विजयपथ सिंघानिया की। कुछ सालों पहले तक हजारों करोड़ के मालिक रहे विजयपथ सिंघानिया के पास आज कुछ भी नही है। अपने ही बेटे के हाथो मोहताज हो चुके है विजयपथ सिँघानिया।

एक जमाना था जब टाटा और बिरला के बाद कोई ब्रांड था तो वो था रेमंड। विजयपथ सिंघानिया ने अपने जिवन में एडवेंचर से बहुत प्यार किया। इसकी दो कहानियां है,

पहली कहानी

एक जमाना था जब विजयपथ सिंघानिया लंदन से अकले प्लेन उड़ाकर भारत आ गए थे।

दूसरी कहानी

जब 67 साल की उम्र में जब आदमी रिटायर होकर नाती पोतों के साथ खेलता है, तब विजयपथ सिंघानिया बलून उड़ा रहे थे।

ये कहानियां तब की है जब विजयपथ सिंघानिया कई हजार करोड़ के मालिक हुआ करते थे। ऐश्वर्य और विलास उनके कदम चूमते थे।

ये तस्वीर आज के विजयपथ सिंघानिया कि है। मुंबई की सड़क पर झोला उठाकर चलते 78 साल के विजय विजयपथ सिंघानिया की। विजयपथ सिंघानिया की कहानी ऐसी है की कलेजा मुंह में आ जाए। आजकल जो आदमी मुंबई की सड़क पर घूमता नजर आ रहा है वो कुछ साल पहले 12 हजार करोड़ का मालिक था। ना धरती फटी ना असमान ने आग उगले लेकिन 12 हजार करोड़ का ये आदमी आज कंगाल हो चूका है। सिर्फ इस लिए क्योकि विजयपथ सिंघानिया नाम का ये बुजुर्ग पोत्र मोह में फस गया।

बेटे पर भरोसा कर सबकुछ उसके नाम कर देने का ये एडवेंचर उसको बहुत भारी पड़ गया। विजय पथ के बेटे गौतम सिंघानिया ने साल 2000 में रेमंड की कमान संभाली औऱ उसकी के बाद विजयपथ के दूरदिन शुरु हो गए। विजयपथ सिंघानिया ने जीते जी 2015 में बेटे गौतम के नाम रेमंड में अपने नाम 1041 करोड़ के 37.17 फिसदी शेयर कर दिए। आज गौतम सिंघानिया रेमंड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दोनो ही है।

पिता ने बेटे को दौलत दी, लेकिन संस्कार नहीं दे पाए। आरोप है कि पिता की अकूत संपत्ति पाने के बाद पिता को पाई पाई को लिए मोहताज कर दिया।

मुकेश अंबानी से भी उचा है जेके हाउस।

 कभी इसी जेके हाउस में हा करता था अरबपति उद्योगपति विजयपथ सिघांनिया का घर। लेकिन ये सब गुज़रे दिनो की बाद है। आज की बात ये है कि रेमंड ग्रूप के चेयरमैन एमिरेट्स विजयपथ सिंघानिया मुंबई की गैंरड पीराड़ी सोशायटी में किराय के मकान में रहते है। जीस कंपनी को उन्होंने बुलंदी तक पहुंचाया, उसने कार और ड्राइवर तक छीन लिया। कंपनी गुजारा करने के लिए फूटी कौड़ी देने के लिए तैयार नहीं है। विजयपथ चाहते है कि उन्हे हर महिने 7 लाख गुजारे के लिए मिले। आरोप है कि बेटे की कंपनी बन चूकी रेमंड जेके हाउस के डुप्लेक्स में रहने के लिए पोजेशन नहीं दे रही है।

जिस मुंबई शहर के 2005-2006 के शोहरत रहे आज पाई पाई के लिए मोहताज है। रेमंड की नीव 1925 में रखी गई थी। मुंबई में पहला स्टोर खुला। लेकिन 1980 में विजयपथ ने कंपनी की कमान संभाली, तो रेमंड को मॉर्डन लुक मिला। पार्क अवेन्यु और कलर प्लस जैसे ब्रांड के साथ रेमंड आज हर घर की जरूरत बन चूका है। जो विजयपथ के साथ आज हो रहा है वहीं उनके भाई अजयपथ सिंघानिया की मौत के बाद उनके परिवार के साथ हुआ। जेके हाउस के डुप्लेक्स घर के लिए विजयपथ कोर्ट जा चुके है। और अजयपथ की पत्नी विणा देवी बेटे अनंत और अक्षयपथ, गौतम सिंघानिया के खिलाफ तीनों ने मिलकर लड़ाई छेड़ी है।

तो आज अपनी ही औलाद से प्यार करना और औलाद पर भरोसा करने की कीमत चुका रहे है विजयपथ सिंघानिया। करोड़पति से कंगाल हो चुके है।         

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