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इस कारण होगा छठा महाप्रलय- खत्म हो जाएंगी...

अभी पिछले दिनों ही मीडिया में ऐसी खबरे वायरल हुई थी कि धरती पर महाप्रलय की भविष्यवाणी की गई है, हालांकि पहले वाले भविष्यवाणी की अब कोई खास चर्चा तो नहीं हो रही है, लेकिन इसके बाद अब एक नई भविष्यवाणी की चर्चा जोरों पर है। यहीं नहीं कहा जा रहा है कि इस बार जो महाप्रलय आएगी उसमें लगभग 30% प्रजातियों का अंत हो जाएगा।

रिपोर्ट के हवाले से दावा किया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने भी माना है कि करीब साढ़े चार अरब साल पुरानी इस धरती पर ऐसा 5 बार हुआ है जब सबसे ज्यादा फैली हुई प्रजातियां नष्ट हो गई हों। इसके बाद अब एक बार फिर से वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी किया है कि छठवें महाप्रलय के संकेत दिखने लगे हैं।

पांचवीं बार के महाविनाश में डायनॉसोर तक का सफाया हो गया था और अब यह धरती छठे महाविनाश के दौर में पहुंच चुकी है। जिसमें धरती पर रहने वाले पक्षी, रेंगनेवाले और उभयचर की प्रजातियों का 30 प्रतिशत हिस्सा गायब हो चुका है। कहा जाता है कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भौगोलिक क्षेत्र छिनने के कारण स्तनधारी जानवर अपनी जनसंख्या का 70 प्रतिशत हिस्सा खो चुके हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बीते 100 सालों में 200 से ज्यादा प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। यह सिर्फ अकैडमिक रिचर्स के लिए मेक्सिको सिटी की यूनिवर्सिटी में रिसर्चर गेरार्दो सेबायोश का कहना है कि यह शोध फिलहाल अकैडमिक रिसर्च पेपर के लिए लिखा गया है। इस संबंध में ज्याद कुछ नहीं कहा जा सकता।

आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने जानवरों की घटती संख्या को ‘वैश्विक महामारी' करार दिया है और इसे छठे महाविनाश का हिस्सा बताया है। बताया जाता है कि अब तक के पांच महाविनाश प्राकृतिक घटनाओं के कारण हुई, लेकिन छठा  महाविनाश जानवरों की घटती संख्या के कारण होगा, जिसका मुख्य कारण भौगोलिक क्षेत्र छिने जाने को बताया जाता है।

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