Breaking News
  • छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान में 3:45 बजे तक 49.12 फीसदी वोटिंग
  • पीएम मोदी ने वाराणसी-हल्दिया राष्ट्रीय जलमार्ग देश को समर्पित किया
  • अफगानिस्तानः राजधानी काबुल में बड़ा धमाका, कई लोगों के मारे जाने की आशंका

28 जून: आजाद भारत का काला दिन, जब छीन ली गयी थी प्रेस की भी आजादी

नई दिल्ली: इमरजेंसी का दौर किसी याद नहीं है। जब देश में आम नागरिक से उसकी स्वतंत्रता छीन कर संविधान को कुचल दिया गया था। इतना ही नहीं प्रेस की आजादी पर भी बैन कर सैकड़ों पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया था।  

बतादें कि पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी ने साल 25-26 जून 1975 को भारत में इमरजेंसी की घोषणा की थी। जिसके बाद भारत में नागरिक के सारे अधिकार छीन लिए गये थे। वहीँ उसी दौरान इस इमरजेंसी का भारत की प्रेस और पत्रकारों ने विरोध शुरू कर दिया था, जिसके बाद 28 जून 1975 को ही इंदिरा गाँधी ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को भी खत्म कर दिया था। जिससे उनके खिलाफ कुछ भी लिखा न जा सके और भारत में नागरिक अधिकारों के दमन की आवाज दब जाए।

योगी की सभा में गूंजा: 'भीख नहीं अधिकार चाहिए, हमें पूर्वांचल राज्य चाहिए'

 

पीएम द्वारा इमरजेंसी की घोषणा के दो दिन के भीतर ही राजनीतिक विरोधियों और आंदोलनकारियों की गतिविधियों पर तो पहरा बिठा ही दिया गया, ब्रिटिश शासन के बाद पहली बार ऐसा हुआ, जब सरकार ने प्रेस पर प्रतिबंध लगाया। पत्रकार से उसकी कमल छीन कर उसे हथकड़ी में जकड़ लिया गया। उस दौर के एक पत्रकार ने बताया कि आलम यह था कि समाचार पत्रों में छपने वाली खबरों को सेंसर कर दिया गया और अखबार छापने से पहले सरकार की अनुमति लेनी पड़ती थी। खबर क्या छापना है? सरकार तय करेगी।

नजरबंदियों को पंजाब सरकार बांटेगी करोड़ों रुपए: जानिए क्या है मामला

जनता की आवाज का पूरी तरह गला गोंट दिया गया था। इमरजेंसी के दौरान 3801 समाचार-पत्रों के डिक्लेरेशन जब्त कर लिए गए। 327 पत्रकारों को मीसा में बंद कर दिया गया। 290 अखबारों के विज्ञापन बंद कर दिए गए। बहुत सारे पत्र-पत्रिकाएं बंद हो गये या उन्हें बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं एक पत्रकार ने बताया है कि भारत की खबरों को कवर करने वाले विदेशी अखबार 'टाइम' और 'द गार्जियन' के प्रतिनिधियों को भारत से निकाल दिया गया। हालाँकि 21 मार्च 1977 को भारत से आपातकाल हट गया। और आम नागरिक सहित प्रेस की स्वतंत्रता वापस आ गयी। लेकिन उसके बाद से आज तक प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला होता आया है।

यह भी देखें-

 

 

loading...