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रोचक इतिहास: 1662 में ही औरंगज़ेब ने बनाया था रॉकेट!

भारत में मुगलों के शासन को लेकर कई तरह के इतिहास पहले से ही प्रचलित हैं, इसके बाद मौजूदा समय में भी मुगलों को लेकर नए नए प्रतिक मिलते रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद में मुगल प्रशासनिक व्यवस्था से संबंदित करीब 1.55 लाख दस्तावेज मिले हैं।

इन दस्तावेजों में शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल का जिक्र किया गया हैं। खबरों के अनुसार इन दस्तावेजों को फारसी भाषा में लिखा गया है, जो मौजूदा समय में तेलंगाना राज्य के आर्काइव्स एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (TSARI) के अधिन है।

दस्तावेजों में मुगल मनसबदारी (प्रशासनिक व्यवस्था, रैंक और स्थिति) और जागीरदारी सिस्टम (सामंती भूमि अनुदान, राजस्व आदि) की एक ग्राफिक तस्वीर पेश की गई है। इसके अलावा प्रशासन, सेना, राजस्व, सामाजिक और कूटनीतिक मामलों के अन्य पहलुओं का भी जिक्र किया गया है।

बताया जाता है कि इन दस्तावेजों में शाहजहां के शासन काल के दौरान की करीब 5000 दस्तावेज और औरंगजेब के शासन काल के 1.50 लाख दस्तावेज हैं। बता दें कि शाहजहां ने 1626 से लेकर 1658 ईस्वी तक शासन किया था तो औरंगजेब ने 1658 से 1707 ईस्वी के बीच शासन किया।

बताया जाता है कि साल 1662 में एक शाही आदेश में कहा गया था कि जाफराबाद सूबा में एक मंसबदार जन सिपार खान को कर्तव्य की उपेक्षा के लिए दंड दिया गया था। इस आदेश में कहा गया कि वह लोहे के रॉकेट बनाने के अपने काम को पूरा किए बिना हिरण के शिकार के लिए किले के बाहर गया था।

इस आरोप में उसे किलेदार के पद से बर्खास्त कर दिया गया और उसका पद भी 200 सवार कम कर दिया गया। लोहे के रॉकेट बनाने के प्रयासों के संदर्भ की आगे की जांच पड़ताल करने की जरूरत बताई जाती है। क्योंकि अल्पविकसित रॉकेट के आविष्कार का श्रेय हैदर अली और उसके बेटे टीपू सुल्तान को दिया जाता है। उनकी सेना ने 1780 और 1792 के बीच आंग्ल मैसूर युद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ इस्तेमाल किया था।

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