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इन 6 महिलाओं के साथ था गांधी जी का ‘अटूट संबंध’

नई दिल्ली: आज एक ऐसे महात्मा की पुण्यतिथी है, जिन्होंने न सिर्फ पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ बढ़ाया बल्कि इस अहिंसा के रास्ते पर संघर्ष करते हुए अपने देश को अंग्रोजों के चंगुल से आजाद भी कराया। जिन्हें आज पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है, जिनका जन्म दो अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ और इनकी मृत्यू 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में हुई थी।

गांधी जी आजीवन सत्य और अहिंसा की मार्ग पर चलते हुए भारती की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाया, जिन्हें पूरा देश राष्ट्रपिता और बापू के नाम से भी जानता है। आपको बता दें कि बापू की हत्या 78 साल की उम्र में नाथूराम गोडसे ने की थी, जब उन्हें गोली मारी गई थी तब मनुबेन और सुशीला नायर बापू के साथ थीं।

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कस्तूरबा गांधी: बता दें कि मोहनदास से गांधी और फिर बापू बनने के एक लंबे सफर में उन्हों कई महिलाओं का साथ मिला। इनमेंसे एक सबसे मुख्य हैं बापू की पत्नी कस्तूरबा गांधी। गांधी जी के पोते अरुण गांधी ने अपनी किताब में दावा किया है कि मोहनदास को महात्मा गांधी बनाने में कस्तूरबा का बहुत बड़ा योगदान है। मोहनदास के जीवन में कस्तूर की एंट्री तब हुई जब मोहनदास केवल 13 साल के थे और कस्तूर 14 साल की थीं।

शादी के बाद कस्तूर का नाम कस्तूरबा पड़ा, कस्तूबा गांधी ने बापू के हर आंदोलन में उनका पूरा साथ दिया, वह खुद एक राजनीतिक कार्यकर्ता और नागरिकों के हक के लिए लड़ने वाली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थीं।

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मनुबेन: गांधी जी से जुड़ी रही महिलाओं में एक नाम है मनुबेन का, जो गांधी जी की परपोती थीं। वह महज 17 साल की उम्र में ही गांधी जी के साथ जुड़ी थी और जब गांधी जी की हत्या हुई तब भी वह उनके साथ थीं। मनुबेन महात्मा गांधी के विश्वासपात्रों में एक थीं जो आखिरी 2 साल में बापू का 'सहारा' बनी और उनके साथ साये की तरह रही। मनुबेन बेन का असली नाम मृदुला गांधी था, जिन्होंने 40 साल की उम्र में अविवाहित रहते हुए दिल्ली में गुमनामी में दम तोड़ा।

सुशीला नायर: गांधीजी की निजी सहायक यानी पर्सनल सेक्रेटरी थी, जो प्यारेलाल की पत्नी की बहन थीं। अपनी बहन के जरिए ही गांधी जी के प्रभाव में सुशीला नायर आईं और वे गांधी जी से काफी प्रभावित हुई थीं, जिसके बाद उनकी निजी डॉक्टर बनीं। सुशीला नायर के लिए गांधी उनके जीवन का केंद्र थे, सुशीला भी उन युवा महिलाओं में शामिल हैं जो गांधी जी के काफी करीब थीं और गांधी की मौत के समय सुशीला भी उनके साथ थीं।

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आभाबेन: वह महात्मा गांधी के भतीजे कनु गांधी की पत्नी थीं, कनु गांधी बापू के फोटोग्राफर भी थे, आभा के जीवन में गांधी जी का काफी प्रभाव था क्योंकि कनु बापू के साथ रहते थे। ऐसे में आभा भी हर समय आश्रम में उनकी देखभाल किया करती थी, बता दें कि जब नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को गोली मारा था तब आभा बेन भी वहां मौजूद थीं।

मीराबेन: इनका पूरा या मूल नाम 'मैडलिन स्‍लेड' था जो एक ब्रिटिश सैन्‍य अधिकारी की बेटी थीं। इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर खादी का प्रचार किया। मीरा ने गांधी जी के लिए अपना देश छोड़ दिया। बता दें कि 'मैडलिन स्‍लेड' को मीरा बेन का नाम गांधी जी ने ही दिया था। कृष्ण भक्त मीरा बेन गांधी जी को भगवान मानती थी और उन्होंने हर समय गांधी जी का साथ दिया।

सरलादेवी चौधरानी:  गांधी जी से इनकी मुलाकात साल 1919 में हुई थी। सरला देवी भी गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित थीं। सरला देवी गांधी का ध्यान रखती थीं और गांधी जी सरला को महान शाक्ति के नाम से बुलाते थे।

आपको बता दें कि 30 जनवरी 2018 को बापू के पुण्यतिथी पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य कई नेता और जाने माने लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

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