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मुस्लिम लड़की से शादी करना चाहते थे 'बापू के पुत्र', तो बापू ने कहां ये धर्म नहीं...

नई दिल्ली :  आज हम बापू की 150वीं जयंती मना रहें हैं। आप सभी जानते हैं कि बापू ने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपनी सर्वस्व जिदगी न्योछावर कर दी थी। वे जातिवाद के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने देश को इस जाति नामक विष से आजाद कराने के लिए कई मुहिम चलाये। जिसका परिणाम यह हुआ कि आज उऩ सभी धर्मों को समाज में समान स्थान प्राप्त हैं। बापू की यह चाहत थी कि लोग धर्म और जाति को छोड़ कर आपस में सौहार्दपूर्ण भाव से रहें। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि बापू ने जिस अंतर धार्मिक और अंतर जातीय विवाह का संदेश देश को दिया था, वे ही इस मुहीम के प्रबल विरोधी थे।

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'बापू' के बेटे को हुआ था मुस्लिम लड़की से प्यार

दरअसल बात यह हैं कि बापू यानी कि मोहनदास करमचंद गांधी के दूसरे बेटे मणिकलाल को एक मुस्लिम लड़की से प्यार था जिससे वे शादी भी करना चाहते थे। वे जानते थे कि बापू इसका समर्थन करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ बापू ने उऩके इस प्रेम का विरोध किया। क्योंकि वह लड़की मुस्लिम समुदाय की थी और बापू नहीं चाहते थे कि कोई दूसरी धर्म की लड़की उनकी घर की बहू बनें। बापू ने अपने बेटे की इस गलती के लिए उसे बहुत ही भला-बुरा कहा औऱ अंत में बापू ने अपने बेटे की विवाह एक हिंदू लड़की से कर दी। पढ़िए बापू का वह पत्र जिसमें उन्होंने अपनी बेटे की प्रेम विवाह के प्रस्ताव का विरोध किया था।

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बापू का पत्र

बापू ने लिखा कि , "अगर तुम हिंदू हो और तुमने फातिमा (मुस्लिम लड़की)  से शादी कर ली और शादी के बाद भी वो मुस्लिम ही रही तो ये एक ही म्यान में दो तलवारों जैसा हो जाएगा। तब तुम अपनी आस्था से हाथ खो बैठोगे। जरा ये भी सोचो कि जो बच्चे पैदा होंगे, वो किस धर्म और आस्था के प्रभाव में होंगे।"

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शादी के लिए धर्म बदलना सहीं नहीं

फिर उन्होंने आगे लिखा, "ये धर्म नहीं अधर्म होगा, अगर फातिमा केवल शादी के लिए अपने धर्म को बदलना भी चाहे तो भी ठीक नहीं होगा। आस्था कोई कपड़ा नहीं, जो आप इसे कपड़े की तरह बदल लें। अगर कोई ऐसा करता है तो धर्म और घर से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। ये कतई उचित नहीं। ये रिश्ता बनाना समाज के लिए भी हितकर नहीं हैं। यह विवाह हिंदू मुस्लिमों पर अच्छा असर नहीं डालेगी। अंतर धार्मिक शादी करने के बाद ना तो तुम देश की सेवा के लायक रह जाओगे और ना ही फीनिक्स आश्रम में रहकर इंडियन ओपिनियन वीकली निकाल सकोगे। तुम्हारे लिए भारत आना मुश्किल हो जाएगा। मैं बा से तो इस बारे में कह भी नहीं सकता, वो तो इसकी अनुमति देने से रहीं।"

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पत्र में बेटे को इतनी खुराक देने के बाद बापू ने अपने इस पत्र में अपने पुत्र को आगे और तगड़ा डोज दिया, उऩ्होंने लिखा कि , "तुम क्षणिक सुख के लिए ही ऐसी शादी के बारे में सोच रहे हो, जबकि तुम्हे मालूम नहीं कि वास्तविक सुख क्या है।"

बापू के पोते ने किया उनके इस व्यवहार के विरोध

अपने पिता के इस पत्र को पढ़कर मणि बहुत निराश हुए। वो समझ गए कि पिता से इसकी अनुमति नहीं मिलने वाली। आज्ञाकारी बेटे की तरह उन्होंने फातिमा से शादी के लिए मना कर दिया। लेकिन गांधी के लिए इस व्यवहार के लिए मणि उन्हें जीवनभर माफ नहीं कर पाए, बल्कि बापू के दो ग्रैंड चिल्ड्रेंस राजमोहन गांधी (Mohandas: A True Story of a Man, His People, and an Empire) और उमा धूपेलिया (Gandhi's Prisoner?: The Life of Gandhi's Son Manilal ) ने इस व्यवहार के लिए उनकी काफी आलोचना भी की।

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"द माइंड ऑफ महात्मा गांधी" के अनुसार

बता दें कि बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर निकोल क्रिस्टी नॉली ने अपनी रिसर्च पेपर में इस विषय पर विस्तार से लिखा है। केआर. प्रभु और यूआर राव ने महात्मा गांधी के विचारों की एक रिकार्डिंग "द माइंड ऑफ महात्मा गांधी" के नाम से की। उसमें गांधीजी कहते हैं, "विवाह जीवन का वो प्राकृतिक तत्व है, जिसमें अगर आप कोई गलत कदम उठाएंगे तो ये खराब स्थिति में आ जाएगी।"

इसी बातचीत में उन्होंने अंतर धार्मिक विवाह को लेकर अपनी असहमति भी जाहिर की। इस पूरे वाकये पर दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ केप की सीनियर हिस्ट्री फैकल्टी उमा धूपेलिया मिस्त्री (गांधीजी की पड़पोती) ने विस्तार से लिखा है। हालांकि 1930 के दशक में उन्होंने अपनी ये धारणा बदल ली।

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महात्मा गांधी की सहयोगी की बेटी थी फातिमा

बता दें कि महात्मा गांधी के बाद इस परिवार की पांचवीं पीढी आ चुकी है। इस परिवार के लोगों ने तमाम दूसरे धर्मों में शादी की, लेकिन अब तक किसी ने भी मुस्लिम धर्म में शादी नहीं की। आपको बता दें फातिमा, बापू के दक्षिण अफ्रीका में विश्वस्त सहयोगी युसुफ गुल की बेटी थी। यह प्रेम तकरीबन 14 वर्षों तक चला।

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