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न बिल्डिंग न छात्र फिर भी 'जिओ इंस्टिट्यूट' फर्स्ट डिविजन से पास!

नई दिल्ली: जियो इंस्टिट्यूट के खुलने से पहले सरकार द्वारा उसे उत्कृष्ट संस्थान में शामिल किये जाने के बाद जहाँ विवाद बढ़ा हुआ है वहीँ अब सरकार ने इसकी सफाई में भी 'अजीब' बयान दिया है। सरकार ने नियमों का देते हुए कहा है कि ऐसा होना संभव है।

बतादें कि सोमवार को खबर आई कि भारत सरकार ने जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान की लिस्ट में शामिल किया है। जिसके बाद अभी तक हजारों जाने माने शिक्षाविद सहित कई लोग इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर किस आधार पर जियो इंस्टिट्यूट को सरकार ने उत्कृष्ट संसथान की लिस्ट में डाला है। विवाद गहरा गया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को आरएसएस और बीजेपी मिलकर दोनों ही दूषित कर रहे हैं। ऐसे में जब सरकार की ओर से जारी विवाद सफाई आई तो वह भी कुर्तक से भरी हुई थी।

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केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आर सुब्रमण्यम ने सफाई देते हुए कहा कि यह सब नियमों के आधार पर किया गया है। दरअसल सरकार के निजी नियमों में ऐसा भी जिक्र होगा कि बिना बिल्डिंग, बिना छात्र और बिना पढ़ाई वाले इंस्टिट्यूट को भी उत्कृष्ट इंस्टिट्यूट का दर्जा दिया जा सकता है तो सरकार ने अपनी उसी शक्ति का प्रयोग करते हुए जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दे दिया है? वहीँ कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि अब सरकार भारी भरकम अनुदान भी देने जा रही है।

सरकार की सफाई में क्या कहा

तो इस तरीके से JK में फिर से सरकार बना सकती है बीजेपी?

 

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आर सुब्रमण्यम ने कहा कि, 'जियो इंस्टिट्यूट को तीसरी कैटिगरी ग्रीनफील्ड कैटिगरी के तहत चुना गया है। इस कैटिगरी के तहत नए संस्थानों को भी शामिल किया जा सकता है। जोकि निर्विवाद होते हैं और वैश्विक शिक्षा देने में सक्षम हैं। इस कैटिगरी के तहत 11 संस्थानों के प्रस्ताव आए थे जिसमें गुणवत्ता के आधार पर जिओ को चुना गया है।' यह बात अलग है कि जियो इंस्टिट्यूट की अभी बिल्डिंग भी नहीं खड़ी हुई है। वहीँ बीजेपी पर शिक्षा का निजीकरण कोई बढ़ावा देने के साथ साथ गरीबों से शिक्षा का अधिकार छीनने का भी आरोप लग रहा है।

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