Breaking News
  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नई metrorailpolicy को मंजूरी दी
  • मध्यप्रदेश: स्थानीय निकाय चुनाव में BJP की जीत
  • केरल के कथित धर्मांतरण मामले की जांच NIA के हवाले: सुप्रीम कोर्ट
  • दिल्ली, यूपी समेत कई राज्यों में फैला स्वाइन फ्लू- अबतक 600 लोगों की मौत
  • सिंचाई परियोजनाओं के लिए 9,020 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मंजूर
  • अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया

जब रोते हुए विधानसभा से निकलीं थी जयललिता, फिर खाई थी ये कसम...

NEW DELHI:- 25 मार्च 1989 और तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा मचा हुआ था। तमिलनाडु राजनीति के आइकॉन एमजीआर के निधन के बाद जयललिता AIADMK पर काबिज हो चुकी थीं और उनकी पार्टी विपक्ष में थी।

विपक्षी नेताओं ने करुणानिधि सरकार पर जयललिता के खिलाफ राज्य मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। सरकार पर जयललिता के फोन टैपिंग के आरोप थे। हालात ऐसे बन गए कि विधानसभा में हाथापाई की नौबत आ गई। इसके बाद जो कुछ हुआ उसे मीडिया ने भारतीय राजनीति के 'पांचाली प्रकरण' का नाम दिया।

जयललिता की जीवनी 'अम्मा जर्नी फ्रॉम मूवी स्टार टू पॉलिटिकल क्वीन' लिखने वाली वरिष्ठ पत्रकार वासंती ने बीबीसी से बातचीत के दौरान इस किस्से का विस्तार से जिक्र किया है। वासंती ने बीबीसी को बताया कि बवाल के बाद विधानसभा स्थगित कर दी गई। जयललिता सदन से बाहर निकल रही थीं तभी डीएमके के सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए उनकी साड़ी पकड़ ली।

वासंती ने बताया कि डीएमके के सदस्य के साड़ी खींचने से जयललिता का पल्लू गिर गया, वह खुद भी जमीन पर गिर गईं। जयललिता अपमान और कमजोरी की पीड़ा से भर चुकी थीं। वह उसी हालत में बाहर निकलीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जयललिता ने बिखरे बालों और अस्त-व्यस्त हालात में ही मीडिया को संबोधित किया। जयललिता ने कहा कि अब विधानसभा में तभी लौटेंगी जब यह महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगी।

वासंती ने इस घटना के त्वरित बाद जयललिता की भावनाओं की व्याख्या करते हुए बीबीसी को बताया कि वह खुद से कह रही थीं कि सीएम बनने के बाद ही लौटेंगी। फिर इसके बाद की कहानी ने इतिहास बना दिया। दो साल बाद 1991 में जयललिता ने अपना यह वादा भी पूरा किया।

राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए विधानसभा चुनाव में AIADMK और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ। इस गठबंधन को 234 सीटों में से 225 पर जीत मिली और जयललिता तमिलनाडु की पहली महिला और सबसे कम उम्र की सीएम बन गईं। 1991 में भारतीय राजनीति ने अपनी 'महानायिका' के जीवन के 'अम्मू से अम्मा' तक के सफर की सबसे बड़ी झलक देखी थी।

loading...

Subscribe to our Channel