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गांधी जी ही नहीं, इनके लिए भी खास है 2 अक्टूबर- थप्पड़ के बदले चपरासी को लगाया गले!

नई दिल्ली: आज ही के दिन दो अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में मोहन दास का जन्म हुआ था, जिन्हें दुनिया भर में मोहन दास करमचंद गांधी (गांधी जी) के नाम से ख्याति प्राप्त है। इस साल 2018 में देश और दुनिया वाले गांधी जी की 150वीं जयंती मना रहे हैं। भारत में राष्ट्रपिता और बापू के नाम से मशहूर हुए गांधी जी के जन्मदिवस पर सरकारी छूट्टी होता है। वहीं इस बार केंद्र की मोदी सरकार गांधी के जन्मदिन पर स्वच्छता समेत अन्य कई प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए गांधी को याद कर रही है।

लेकिन दो अक्टूबर का दिन सिर्फ गांधी जी नहीं बल्कि एक और महान पुरुष के लिए खास है। जिनका नाम लाल बहादुर शास्त्री है। वह देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे जिनका जन्म दो अक्टूबर 1904 को हुआ था। इस साल गांधी की जी की 150वीं जयंती मनाई जा रही है तो शास्त्री जी की 115 वीं जयंती है। अक्सर ऐसा होता है रहा है कि दो अक्टूबर के दिन हर साल जिनती चर्चा गांधी जी की होती है उसके मुकाबले शास्त्री की चर्चो थोड़ी फीकी पड़ जाती है।

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लेकिन आज यहां आपको दो अक्टूबर के दिन शास्त्री जी को याद करते हुए उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा बता रहे हैं। इससे पहले बता दें कि लाल बहादुर शास्त्री अपने सरल, सच्ची और निर्मल छवि के लिए खास तौर पर जाने जाते हैं। आज के जमाने में भी उनकी ईमानदारी और खुद्दारी की मिसाल दी जाती है।

आपको बता दें कि शास्त्री जी से जुड़ा ये रोचक किस्सा तब का है जब वह पढ़ाई करते थे। इस दौरान शास्त्री जी बनारस के हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की पढ़ाई कर रहे थे। इस बीच एक दिन शास्त्री जी ने साइंस प्रैक्टिकल में इस्तेमाल होने वाले बीकर तोड़ दिया और उन्हें ऐसा करते हुए देवीलाल नाम के एक चपरासी ने देख लिया।

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शास्त्री जी की इस गलती के लिए चपरासी ने उन्हें जोड़ का थपड़ जड़ दिया। इसके कुछ समय बाद जब शास्त्री जी रेल मंत्री बने और साल 1954 में वह एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान मंच पर देवीलाल भी मौजूद थे, जो शास्त्री जी को देखकर वहां से भगने लगे। लेकिन इससे पहले ही उन्हें शास्त्री जी ने देख लिया और उन्हें अपना पास बुलाकर गले से लगा लिया।

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