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लंदन से खाली हाथ लौटे गुरुदेव टौगोर की अनजानी बातें, 8 साल के उम्र में ही...

नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रगान जन गन मन के लेखक गुरू रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म आज ही के दिन 7 मई 1861 में कोलकाता में हुआ था। उनके पिता देबेन्द्रनाथ टैगोर उन्हें बैरिस्टर बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने रविंद्रनाथ को साल 1878 में इंग्लैंड भेज दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन में लॉ की पढाई के लिए दाखिला लिया पर कुछ समय बाद उन्होंने पढाई छोड़ दी और शेक्सपियर और कुछ दूसरे साहित्यकारों की रचनाओं का अध्यन किया। सन 1880 में बिना लॉ की डिग्री के वो बंगाल वापस लौट आये। साल 1883 में उनकी शादी मृणालिनी देवी से हुई।

अगर उनको सिर्फ लेखक कहा जाये तो इसमें उनका अपमान होगा, क्योंकि टैगोर न सिर्फ लेखक थे बल्कि वो एक कवि, नाटककार, संगीतकार और चित्रकार भी थे। वो अकेले ऐसे भारतीय साहित्यकार हैं जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला है। वो नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई और साहित्य में नोबेल पाने वाले पहले गैर यूरोपीय भी थे। इसके अलावा वो दुनिया के अकेले ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान हैं।

भारत का राष्ट्र-गान ‘जन गण मन’ और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान ‘आमार सोनार बांग्ला’ है जिनकी रचना टौहोर ने की थी। गुरुदेव के नाम से प्रसिद्ध रविंद्रनाथ टैगोर ने बांग्ला साहित्य और संगीत को एक नई दिशा दी।जब वो मात्र 8 साल के थे तब उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी थी। 16 साल की उम्र में ‘भानुसिम्हा’ उपनाम से उनकी कवितायें प्रकाशित भी हो गयीं। वो घोर राष्ट्रवादी थे और ब्रिटिश राज की आलोचना करते हुए देश की आजादी की मांग की थी।

जलिआंवाला बाग़ कांड के बाद उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिए गए नाइटहुड का त्याग कर दिया।उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 4 साल दर्द और बीमारी में बिताये। साल 1937 के अंत में वो अचेत हो गए और बहुत समय तक इसी अवस्था में रहे। लगभग तीन साल बाद एक बार फिर ऐसा ही हुआ। इस दौरान वो जब कभी भी ठीक होते तो कवितायें लिखते। इस दौरान लिखी गयीं कविताएं उनकी बेहतरीन कविताओं में से एक हैं। आपको बता दें उन्होंने लगभग 2230 गीत लिखे – इन गीतों को रविन्द्र संगीत कहा जाता है। लम्बी बीमारी के बाद 7 अगस्त 1941 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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