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इस खोज ने भारत को दी एक नई पहचान!

नई दिल्ली: आज कल भारत का नाम पूरी दुनिया के जुवान पर है, इसका सबसे मुख्य कारण हैं देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने पीएम बनने के बाद दुनिया के कई देशों का दौरा किया और उस देश के साथ भारत के बेहतर सबंध स्थापित किए। हालांकि ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद ही लोग भारत को जान सकें हैं।

दरअसल पूरी दुनिया में भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का डंका पिछले काफी समय से बजता रहा है। ऐसे में चीनी यात्री ह्यांग सांग ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति का बेहद ही रोचक और सुंदर वर्णन किया है, लेकिन भारत की सभ्‍यता और संस्‍कृति का असली परिचय तो इस नगर की खोज से हुए, जिससे एक अलग ही पहचान मिल गई।

भारत की सिंधु घाटी सभ्‍यता और मोहन जोदड़ो नगर सभ्‍यता पूरी दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्‍यता के तौर पर जानी जाती है। बता दें कि खुदाई के दौरान मोहन जोदड़ो की सभ्यता का खोज हुआ जिसने भारत को एक अलग ही पचान दी। आपको बता दें कि मुअनजो-दड़ो सिंधी भाषा का शब्‍द है, जिसका अर्थ है ‘मुर्दों का टीला’,  यह दुनिया का सबसे पुराना नियोजित और उत्कृष्ट शहर माना जाता है।

बताया जाता है कि सिंधु घाटी की सभ्यता के सबसे व्यवस्थित तरीके से बसे शहरों में से एक है मोहन जोदड़ो, इस नगर की खोज राखालदास बनर्जी ने 1922 में किया था। खुदाई के समय बड़ी संख्या में इमारतें, धातुओं की मूर्तियां और मुहरें आदि मिले थे, कहा जाता है कि बीते 100 सालों में अब तक इस शहर के एक-तिहाई भाग की ही खुदाई हो सकी है, जोकि अब बंद भी हो चुकी है।

इतिहासकारों और जानकारों के मानना है कि सिंधु घाटी सभ्‍यता का यह शहर जो कि अब पाकिस्‍तान के लरकाना से बीस किलोमीटर दूर और सक्खर से 80 किलोमीटर दूर जनूब मगरिब में स्‍थित है, विश्‍व की सबसे प्राचीन नागर सभ्‍यता है। अविभाजित हिंदुस्‍तान में इस नागर सभ्‍यता की खोज ने पूरी दुनिया में भारत के सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत् विकास की एक अलग पहचान बताई।

 

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