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125वीं जयंती: भारत के सान बोस के कारण कईयों को मिला नोबल- लेकिन इन्हें नहीं...

नई दिल्ली: आज एक जनवरी को देश के साथ-साथ पूरी दुनिया नए साल 2018 के जश्न में डूबी है, वहीं आज महान वैज्ञानिक एस.एन. बोस की 125वीं जयंती है। देश के सान भारतीय भौतिकशास्त्री प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस को (बोस-आइन्स्टाइन सांख्यिकी) का जनक माना जाता है। बोस ने छोटे से छोटे कणों की अवधारणा को माना था और इसी आधार पर प्रोफेसर बोस के नाम पर इन्हें बोसोन्स का नाम दिया गया।

आपको बता दें कि आधुनिक भौतिकी यानी क्वांटम भैतिकी को नई दिशा देने वाले प्रसिद्ध गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म एक जनवरी 1894 को कोलकाता में हुआ था। सत्येन्द्र नाथ बोस क्वांटम मकेनिक्स के अग्रणी वैज्ञानिक माने जाते हैं जिन्होंने न केवल प्लांक के विकिरण नियम की गलतियों में सुधार किया बल्कि प्लांक के नियम की नयी व्युत्पत्ति भी दी।

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बोस की 125वीं जयंती पर कोलकाता में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, इस कार्यक्रम को पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित करेंगे। बता दें कि एसएनबोस ने भौतिक विज्ञान को एक बिलकुल ही नयी अवधारणा से परिचित कराया और क्वान्टम फ़िज़िक्स के अध्ययन की नीव रखी। डॉ. सत्येंद्रनाथ बोस ने नये नियमों की खोज की, जो आगे चलकर 'बोस-आइंसटाइन साँख्यिकी' के नाम से जाने गये।

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इस नियम के सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने परमाणु-कणों का गहन अध्ययन किया और पाया कि ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। इनमें से एक का नामकरण डॉ. बोस के नाम पर 'बोसॉन' रखा गया और दूसरे का नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक एनरिको फर्मी के नाम पर 'फर्मिऑन'।  साल 1924 में सत्येंद्र नाथ बोस ने एक शोध पत्र तैयार किया जिसका नाम "प्लांक्स लॉ एण्ड लाइट क्वांटम" रखा।

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इस शोध पत्र को जब किसी पत्रिका ने नहीं छापा तो सत्येन्द्रनाथ ने उसे सीधे आइंस्टीन को भेज दिया। उन्होंने इसका अनुवाद जर्मन में स्वयं ही किया और प्रकाशित भी कराया। ये बेहद अचरज की बात है कि बोस के सिद्धांतों और विचारों पर काम करने वाले कई शोधकर्ताओं को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया लेकिन उन्हें कभी भी नोबल सम्मान से सम्मानित नही किया गया।

गौर हो कि भारत सरकार ने उन्हें 1954 में पद्म विभूषम से सम्मानित किया। इसके पांच साल बाद ही उन्हें राष्ट्रीय प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया जो एक स्कॉलर के लिए देश में ये सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें भौतिकी, गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, खनिज विज्ञान, दर्शन, कला, साहित्य और संगीत समेत विभिन्न क्षेत्रों में गहरी दिलचस्पी थी।

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