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इस दिन पहली बार गाया गया था 'वंदेमातरम्'

नई दिल्ली: आज का इतिहास बेहद ही खास है, क्योंकि आज ही के दिन कलकत्ता में साल 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में पहली बार गाया 'वंदेमातरम्' गया था। यह भारत का संविधान सम्मत राष्ट्रगीत है।

'वंदेमातरम्' बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत बांग्ला मिश्रित भाषा में रचित इस गीत का प्रकाशन सन् 1882 में उनके उपन्यास आनन्द मठ में अन्तर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस उपन्यास में यह गीत भवानन्द नाम के संन्यासी द्वारा गाया गया है। इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनायी थी।

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आपको बता दें कि बंगाल में चले स्वाधीनता-आन्दोलन के दौरान विभिन्न रैलियों में जोश भरने के लिए 'वंदेमातरम्’  का गायन किया जाता था। जिसके बाद धीरे-धीरे इस गीत की लोकप्रिय और भी बढ़ती गई, जिससे घबराए अंग्रेज सरकार इसे प्रतिबंधित करने की योजना भी बनाने लगी थी।

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इस दौरान सन् 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इस गीत को गया। पांच साल बाद यानी सन् 1901 में कलकत्ता में हुए एक अन्य अधिवेशन में श्री चरणदास ने यह गीत को फिर से गाया, जिसके बाद साल 1905 में बनारस अधिवेशन के दौरान इस गीत को सरलादेवी चौधरानी ने भी गया।

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बता दें कि कांग्रेस-अधिवेशनों के अलावा आजादी के आन्दोलन के दौरान कई बार इस तीत को गाया है, ताकि क्रातिकारियों के हौसले और भी बुलंद किया जा सके। यहां एक और जानकारी दे दें कि जब लाला लाजपत राय ने लाहौर से 'जर्नल' का प्रकाशन शुरू किया था तब उन्होंने उसका नाम भी वन्दे मातरम् ही रखा था। इसके अलावा अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए आजादी की दीवानी मातंगिनी हाजरा की जुबान पर भी आखिरी शब्द "वन्दे मातरम्" ही था।

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