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ऐसे होते हैं कम्युनिस्ट और इतना खतरनाक है उनकी विचारधारा !

कम्युनिस्ट के इतिहास को लेकर आपने पहले भी सुना होगा, लेकिन आज हम आपको कम्युनिस्ट के इतिहास और उनकी विचार धारा से जुड़ी कुछ अह बाते बताने जा रहे हैं। दरअसल कहा जाता है कि कम्युनिस्ट आंदोलन में भाकपा की स्थापना को लेकर विवाद है। भाकपा का मानना है कि उसका गठन 25 दिसम्बर 1925 को कानपुर में हुई पार्टी कांग्रेस में हुआ था।

जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, जो 1964 में हुए पार्टी-विभाजन के बाद बनी थी, इनका मानना है कि पार्टी का गठन 1920 में हुआ था। ऐसे में अगर आप माकपा के दावे को मानते हैं तो पता चलता है कि भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 17 अक्टूबर 1920 को कम्युनिस्ट इंटरनैशनल की दूसरी कांग्रेस के तुरंत बाद ही हुआ था।

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बहरहाल, ऐसा कह सकते हैं कि 1920 से ही पार्टी के गठन की प्रक्रिया जारी थी, इस संबंध में कई समूह भी उभर कर सामने आये, लेकिन औपचारिक तौर पर पार्टी का गठन 1925 में ही हुआ। इसके शुरुआती नेताओं में मानवेन्द्र नाथ राय, अबनी मुखर्जी, मोहम्मद अली और शफ़ीक सिद्दीकी आदि के नाम मुख्य तौर पर शामिल हैं।

कम्युनिस्ट विचारधार और उनकी सोच को लेकर कई बाते बताई जाती है, जिनमे से कुछ बातों की चर्चा हम आसान शब्दों में कर रहे हैं। कहा जाता है कि अगर आप किसी के यहां नौकरी करते हैं, या आपके यहां कोई नौकर काम करता है, और कोई व्यक्ति उससे कहता है कि तुमहारा मालिक तुमसे ज्यादा कैसे कमा रहा है, तुम उसके यहां काम मत करों, उसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करों और लोगों को साथ लाकर आंदोलन शुरू करो, अगर तब भी तुमहारा काम नहीं बनता है तो उसके खिलाफ हथियार उठा लो, अगर तुमाहारे पास हथियार के भी पैसे नहीं हैं तो मैं दूंगा, ऐसे सलाह देने वाले लोग कम्युनिस्ट होते हैं, या फिर वह कम्युनिस्ट विचारधारा के अधिन आते हैं।

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ऐक और उदाहरण के साथ समझा जाए तो ऐसा कहा जाता है कि, यदि आपके घर में आपको किसी चीज से चोट लग गई तो वह व्यक्ति आपसे बोलता है, यह घर तुम्हारे लायक नहीं, यह तुम्हारा दुश्मन है, तुम इसे तोड़ दो, मैं तुम्हें इससे अच्छा घर दिलाऊंगा, ऐसा आदमी भी कम्युनिस्ट या उसी विचारधार से जुड़ा होता है।

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