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‘1962 में नेहरू की कोशिशों के कारण भारत ने चीन को हराया था’

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच मौजूदा समय में ‘डोकलाम’ को लेकर विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा है। बता दें कि मुख्य तौर पर ‘डोकलाम’ का विवाद चीन और भूटान के बीच है, लेकिन भारत भी इसे विवादित मानता है, भारत और भूटान इसे भूटानी क्षेत्र मानते हैं, इस बीत को लेकर विवाद की स्थिती बरकरार है।

file photo

लेकिन आज हम उस विवाद की चर्चा नहीं बल्कि एक दूसरे विवाद की चर्चा कर रहे हैं। गौर हो कि पहले भी ऐसा हो चुका है जब बच्चों को पढ़ाए जाने वाले इतिहास से छेड़छाड़ किया गया है, और ऐसा ही मामवा एक बार फिर से देखा जा रहा है।

बता दें कि मध्यप्रदेश में आठवीं क्लास की संस्कृत की किताब में बताया जा रहा है कि 1962 में चीन और भारत के बीच हुई लड़ाई में भारत को जीत मिली थी, गौर हो कि ये किताब CBSE से जुड़े स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस किताब को लिखने वाले एक नहीं 5 लेखल है, जिनमें प्रोफेसर उमेश प्रसाद रस्तोगी का नाम भी शामिल हैं, जबकि इस किताब का प्रकाशन लखनऊ की कृति प्रकाशन प्राइवेट लि. के द्वारा किया गया है।

इस किताब में बताया जा रहा है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में भारत की सेना ने चीन को हराया था। किताब के अनुसार नेहरू के कार्यकाल में चीन ने भारत पर हमला किया था, लेकिन नेहरू की कोशिशों से हमने चीन को हराया। हालांकि, चीन ने भारत पर धोखे से हमला किया था, जिसमें भारत को ‘हार का मुंह’ देखना पड़ा था।

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