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आज ही के दिन अंग्रेजों ने टैगोर को दी थी ‘नाइट हुड’ की उपाधी, 4 साल बाद इसलिए कर दिया था वापस

नई दिल्ली: 3 जून 1915, आज ही के दिन नोबेल पुरस्कार विजेता, विश्व विख्यात बांग्ला लेखक व कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर को ब्रिटिश सरकार ने ‘नाइटहुड’ यानि सर की उपाधि से नवाजा था। हालांकि इसके करबी चार साल बाद ही 13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोधस्वरूप टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि ब्रिटिश सरकार को लौटा दी थी।

7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में जन्मे टैगोर का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुई थी। वह  एशिया के प्रथम ऐसे व्यक्ति थे जिन्‍हे साहित्‍य के लिए नोबेल पुरस्‍कार से सम्मानित किया गया था। भारत के राष्ट्रगान के रचयिता रबीन्द्रनाथ ठाकुर एकमात्र ऐसे कवि हुए जिनकी दो रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं।

टैगोर की एक रचना ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्र-गान है, जबकि उनकी एक अन्य चरना ‘आमार सोनार’ बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान है। गीतांजली, गीताली, गीतिमाल्य ऐसे कई प्रमुख रचनाएं हैं जिनकी बदौलत टैगोर आज भी याद किए जाते हैं। चलते चलते एक और खास जानकारी दे दें कि वो शख्स रविन्‍द्र नाथ टैगोर ही थे जिन्होंने गान्धी जी को पहली बार महात्मा कहकर पुकारा था।

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