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फिर निकाले गए आलोक वर्मा, 55 सालों में पहली बार किसी सीबीआई डायरेक्टर के साथ हुआ ऐसा!

नई दिल्ली: देश सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के नाम सुनते ही हर तरह के भ्रष्टाचारी या अपराधी थर्राने लगने हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों सीबीआई की पूरा विवाह थर्रारा रहा है। इस बीच सीबीआई के अंदर और बाहर से जुड़े कई ऐसे खुलासे हुए जिसमें जांच एजेंसी प्रतिष्ठा सरेआम नीलाम कर दी।

सीबीआई के दो टॉप लेवल अधिकारियों के बीच घुसखोरी कांड से शुरू हुई लड़ाई अब शायत अंतिम चरण में हैं। घुसखोरी कांड के खुलासे के बाद सीबीआई में मचे उबाल की भेंट चटे सबसे बड़े अधिकारी सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का पत्ता पूरी तरह से साफ कर दिया गया है।

दरअसल, सीबीआई में मचे बावाल के बीच सरकार ने आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया था। लेकिन सरकार के इस फैसले के खिलाफ वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है उन्होंने कोर्ट में बाजी मार ली, कोर्ट के आदेश पर उन्होंने फिर से सीबीआई निदेशक का चार्चा मिला और आते ही वर्मा ने अपने तेवर दिखाने शुरू किए।

हालांकि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की करीब दो घंटे से भी अधिक समय तक गुरुवार को चली बैठक में आखिर कर आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया। जानकारी के अनुसरा सीबीआई निदेशक का निर्धारित कार्यकाल दो सालों का होता हैं और वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला और वह उसी दिन सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

बताया जाता है कि वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में पद से हटाया गया है। बताया जाता है कि सीबीआई के 55 सालों के इतिहास में किसी भी निदेशक को पहली बार ऐसी कार्रवाई का समाना करना पड़ा है। सीवीसी की रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ आठ आरोप लगाए गए थे।

गुरुवार देश शाम जारी एक आदेश में बताया गया कि वर्मा को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है। जबकि सीबीआई का प्रभार अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दिया गया है।

बता दें कि इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस ए के सीकरी भी शामिल थे। खबरों के अनुसार वर्मा को पद से हटाने से पहले खड़गे उनकी राय जानना चाहते थे, लेकिन बैठक में इस बात पर सहमति नहीं बनी, जिसके कारण उन्हें पद से हटाने का फैसला लिया गया।

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