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महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म! आधार तो सरकार बनाती है, लेकिन आदमी को इंनसान कौन बनाए?

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकरा ने पिछले काफी दिनों तक चली लंबी बहस के बीच लगभग सभी तरह के सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। तो वहीं आधार कार्ड सिर्फ सरकारी योजनाओं के लिए ही नही करीब-करीब हर चीज के अनिवार्य होता जा रहा है।

वैसे आधार को लेकर सरकार की मंशा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सके और साथ ही साथ-साथ देश की सुरक्षा में भी आधार अहम योगदान निभा सकता है। लेकिन इन बातों से उलट आज एक चौकाने वाला मामला सामने आया है।

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हालांकि सीधे तौर पर इस मामले में आधार को जिम्मेदार ठहराना भी गलत है, क्योंकि जब इनसानियत ही मर चुकी है, ‘तो फिर काहे का इंसान और किस बात की पहचान’। दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में ओरिजनल आधार कार्ड नहीं होने के कारण एक गर्भवती महिला का सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं किया गया।

सरकारी अस्पताल और सरकार के इस कठोर कानून के कारण महिला को मजबूरन सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। आपको बता दें कि यह मामला उसी भाजपा शासित राज्य हरियाणा से है जो ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, लेकिन एक गर्भवति महिला जिसके पेट में शायद बेटी ही पल रही थी, उसे सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया। हालांकि इस मामले में मीडिया की चहलकदमी के बाद सोती सरकार की निंद खुली है, और मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जांच के निर्देश दिए हैं।

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इस पूरे मामले में बताया जाता है कि मध्यप्रदेश की रहने वाली गर्भवती महिला मुन्नी अपने इलाज के लिए गुरुग्राम के अस्पताल में पहुंची थी, जहां के डॉक्टरों ने इलाज से पहले आधार कार्ड की मांग की, जिसके बाद महिला के पति ने आधार कार्ड की एक कॉपी दी, लेकिन तब भगवान का दर्जा रखने वाले डॉक्टर नहीं माने और असली आधार कार्ड की मांग करते रहे हैं।

इस बीच महिला की पीड़ा तेज हुई और उसने वहीं अस्पताल के गेट पर ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया, लेकिन इसके बाद भी अस्पताल के पढ़े लिके डॉक्टरों नें महिला तो तब तक अस्पताल में भर्ती नहीं किया, जबतक वहां मीडिया की टीम नहीं पहुंची, इसके बाद तो मानो डक्टरों के पैर में पहीए लग गए हो, हालांकि इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए है।

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तो वहीं इस मामले में पर अस्पताल की ओर से शर्मनात बयान देते हुए बताया गया है कि, यहां ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार महिला को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया था।

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