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जेल मैन्यूअल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बड़ा है क्या

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का 'आपत्तिजनक' मीम शेयर करने के मामले में गिरफ्तार हुआ भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी समय पर रिहा नहीं किया गया। जिससे नाराज कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में प्रियंका की गिरफ्तारी मनमानी है। अगर उसे रिहा नहीं किया गया तो अवमानना का मामला शुरू करेंगे। बंगाल सरकार को फटकार लगाते  हुए कोर्ट ने कहा कि आधे घंटे में प्रियंका को रिहा किया जाए। बता दें कि कोर्ट की ये टिप्पणी उस वक्त आई जब प्रियंका के परिवार वालों ने वकील की मदद से कोर्ट के बताया कि आदेश के बाद भी उसे रिहा नहीं किया गया है।

वहीं बंगाल सरकार ने डीजी जेल के हवाले से बताया कि प्रियंका को 9 बजकर 40 मिनट पर रिहा किया गया है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि आदेश कल जारी किया गया था, फिर उसे कल क्यों नहीं रिहा किया गया? कोर्ट के सवाल पर सरकार की ओर से कहा गया कि रिहाई का आदेश शाम पांच बजे मिला और जेल मैन्यूअल के कारण रिहाई नहीं हो सकी।

हालांकि सरकार के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि क्या जेल मैन्यूअल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बड़ा है? वहीं प्रियंका के वकील नीरज किशन कौल ने कोर्ट से कहा कि पुलिस ने मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की तो इसकी जानकारी प्रियंका के परिवार को नहीं दी गईल और ना ही मंगलवार को इस संबंध में कोर्ट को कोई जानकारी दी गई।

आपको बता दें कि अब सुप्रीम कोर्ट जुलाई में याचिका पर सुनवाई करेगा कि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद माफी की जरूरत नहीं है। प्रियंका के वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रियंका को रिहा करने से पहले जबरन माफीनामा लिखवाया गया। बता दें कि प्रियंका ने सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी की एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसके लिए उन्होंने गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस तस्वीर में बीजेपी नेता प्रियंका ने बॉलीवुड से हॉलीवुड तक धमाल मचा चुकी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की ‘मेटा गाला’ लुक पर ममता बनर्जी का चेहरा चस्पा दिया था। 

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