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साध्वी की अखंड प्रतिज्ञा!

भोपाल: विवादित बयानों के जंजाल में उलझे साध्वी प्रज्ञा ने लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले सोमवार को एक बड़ी ‘प्रतिज्ञा’ की है। अपने बयानों के कारण आलोचनाओं का शिकार हो रही साध्वी ने एक बार फिर से माफी मांगते हुए मौन व्रत रखने का फैसला किया है। मालेगांव बम धमाका मामले में मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी ने ‘भगवा आतंकवाद’ के खिलाफ सिंबल के तौर पर पेश करते हुए देश के बहुसंख्यक दबके को साधने की कोशिश की है।

साध्वी राजनीति में लने का बीजेपी का फैसला सही साबित होता है या गलत इसका फैसला 23 मई को होगा। लेकिन इतना जरूर है कि राजनीति में आने के साथ ही साध्वी अपने विवादों के कारण खुद की और पार्टी की काफी किरकिरी करा चुकी हैं। मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने पहले मुंबई हमले में शहीद हुए एटीएस अधिकारी हेमंत करकरे के लिए आपत्तिजनक बयान दिया।

साध्वी के इस बयान पर जारी घमासान अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि उन्होंने राष्ट्रपित महात्मागंधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे को राष्ट्रभक्ता करार दे दिया। चुनावी मौसम में साध्वी के मुख से निकले ये दोनों बयान बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार दिख रहा था। हालांकि बीजेपी ने समय रहते हुए साध्वी के बयान से अपना पल्ला झाड़ उन्हें माफी के लिए मजबूर कर राह से कांटे हटाने की कोशिश की है, लेकिन कांटे हटे या चुभे इसका फैसला भी 23 मई को चुनावी नतीजे के साथ होगा।

लेकिन इससे पहले साध्वी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, “चुनावी प्रक्रियाओं के उपरान्त अब समय है चिंतन मनन का, इस दौरान मेरे शब्दों से समस्त देशभक्तों को यदि ठेस पहुंची है तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अंतर्गत प्रायश्चित हेतु 21 पहर के मौन व कठोर तपस्यारत हो रही हूं। हरिः ॐ।”

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