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कोर्ट के कुरान बांटने के आदेश पर खफा हुई ऋचा, पूछा ...भगवतगीता और बाइबिल क्यों नहीं

नोएडा : कभी मोबाइल लिंचिंग का मामला, तो कभी छेड़खानी का मामला और कभी धार्मिक सौहार्द्र का मामला इन सभी मामलों में कोर्ट सुनवाई भी करती हैं और अपना निर्णय भी सुनाती हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हैं जब किसी कोर्ट ने किसी धार्मिक सौहार्द्र मामले में एक ऐसा निर्णय सुनाया हैं जिससे वो सुर्खियों में आ गया हैं। आपको बता दें कि यह मामला झारखंड के रांची कोर्ट की हैं। जहां एक ऐसे केस की सुनवाई हो रहीं थी, जिसमें एक महिला पर धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने का आरोप लगा था। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

इस केस की सुनवाई में कोर्ट ने महिला को 5 कुरान बांटने का आदेश दिया। जिसमें से एक कुरान सूचक सदर अंजुमन कमेटी पिठोरिया के मंसूर खलीफा को और अन्य चार कुरान को सरकारी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में स्वयं जाकर दान देने को कहा। जिससे ये महिला नाराज हो गई, और उन्होंने कोर्ट के इस आदेश को पालन करने से मना कर दिया। बता दें कि इस महिला का नाम ऋचा भारती है, जिसके पक्ष में तमाम बीजेपी कार्यकर्ता भी खड़े हो गए।

उन्होंने कहा कि 'मैं कोर्ट के आदेश का पालन करती हूं लेकिन मैं रांची कोर्ट के फैसले के विपक्ष में हाई कोर्ट में अपील दाखिल करूंगी क्योंकि मुझे लगता है कि सही न्याय नहीं हुआ। ऋचा ने कहा कि, मैं मामले की ज्यादा बारिकियों में जाने के बजाय, सिर्फ इतना पूछना चाहती हूं कि जब पहले ऐसा कोई मामला आया होगा तो क्या किसी को बाइबिल या भगवदगीता या मंदिर के दर्शन करने का आदेश मिला है?

वहीं मामले को लेकर ऋचा के पिता प्रकाश पटेल ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर यकीन है और वह सभी कानूनी विकल्प की मदद लेंगे। ऋचा के पिता ने कहना है कि, 'निचली अदालत के आदेश की कॉपी मिलते ही हम इसके खिलाफ अपील दायर करने पर विचार कर रहे हैं।' ऋचा के वकील ने कहा कि उन्हें मंगलवार शाम तक कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है।

गौतलब हो कि, सोशल मीडिया पर मुद्दे के ट्रेंड होने और खबरों में आने के बाद से परिवार को जिला प्रशासन द्वारा एहतियातन सुरक्षा दी गई है। झारखंड के बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने ऋचा के पिथौरिया स्थित आवास में जाकर मुलाकात की और उनका समर्थन जताया।

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