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आतंकवादी भी लड़ रहा है लोकसभा चुनाव चुनाव?

भोपाल: बीजेपी की टिकट पर मध्य प्रदेश के भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ रही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर चुनावी मैदान में कूदने के साथ ही विवादों का सामना कर रही हैं। इस बीच उन्होंने एक और विवादित बयान देते हुए भोपाल से अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार के लिए आतंकी शब्द का प्रयोग किया और कहा कि, एक बार फिर ऐसे आतंकी का समापन करने के लिए संन्यासी को खड़ा होना पड़ा है।

यहां सीहोर में चुनाव प्रचार कार्यालय का उद्घाटन करते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि, “16 साल पहले उमा दीदी ने हराया था, जिसके बाद से मुंह नहीं उठा पाया, राजनीति कर लेता इसकी कोशिश नहीं कर पाया। अब फिर से सिर उठा है तो दूसरी संन्यासी सामने आ गई है जो उसके कर्मो का प्रत्यक्ष प्रमाण है”।

आपको बता दें कि इससे पहले साध्वी ने खुद के साथ हुए अत्याचार की कहानी सुनाते हुए मुम्बई आतंकी हमले (26/11) में आतंकियों की गोली से शहीद हुए एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा था कि, उसने मुझे प्रताड़ित किया। मैंने उससे कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा।

साथ ही साध्वी ने बाबरी मस्जिद के ढांचे को तोड़ने की बात भी स्वीकार की थी। जिसके कारण वह विवादों में घिर गई थी। वहीं पार्टी ने यह कहते हुए साध्वी के बयान से पल्ला झाड़ लिया था कि ये बयान उनके निजी विचार हैं। आपको बता दें कि साध्वी का इतिहास बेहद ही विवादित रहा है, हालांकि वह खुद ऐसा नहीं मानती हैं। साध्वी की माने तो वह कभी भी विवादों में नहीं रही, उनके खिलाफ साजिश रची गई।

उन्होंने कहा कि मालेगांव बम विस्फोट में गिरफ्तार किए जाने के बाद प्रताड़ित किया गया। रात-रात भर पीटा जाता था, मुझे कई-कई दिन सिर्फ पानी के सहारे निकालने पड़े हैं। बता दें कि साध्वी प्रज्ञा महाराष्ट्र के नासिक के मालेगांव में हुए धमाके बाद से देश भर में चर्चा में आई थीं। इस मामले में वह मुख्य आरोपी रही हैं। साध्वी के खिलाफ मुंबई एटीएस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट में कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। लेकिन एनआईए ने साध्वी के खिलाफ मकोका समेत अन्य कई धाराएं हटा ली। जिसके कारण साध्वी का केस कमजोर पड़ गया और वह स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत पर चल रही हैं।

मालेगांव बम विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा करीब 9 साल जेल की सजा काट चुकी हैं। हालंकि अब तक यह तय नहीं हो सका है कि मालेगांव में साध्वी की कोई भूमिका थी या नहीं। लेकिन बोलने की आजादी की विडंबना है कि देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले नेता साध्वी को खुलेआम आतंकी बता रहे हैं। तो अब आतंकवाद की आरोपी साध्वी भी विरोधी के खिलाफ आतंक की वाण चल रही हैं। 

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