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...पद्मश्री पुरस्कार ने मुझे चींटियों के अंडे खाने को मजबूर कर दिया

नोएडा : ऐसा कहा जाता हैं कि अगर आप किसी पुरस्कार से सम्मानित होते हैं तो समाज में आपका दर्जा ऊंचा हो जाता है, लेकिन इतना ऊंचा दर्जा, जिससे किसी के खाने के भी लाले पड़ जाए। यहीं हाल इस किसान के साथ भी हुआ है, जिसे देश के सबसे बड़े पुरस्कार में शामिल पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन इस पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद इस किसान को चींटियों के अंडे खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

इस किसान का कहना है कि इस पुरस्कार के कारण उन्हें 700 रूपये प्रति माह तो मिलते हैं लेकिन यह राशि उनके जीवन यापन के लिए काफी नहीं है। जबसे मुझे यह पुरस्कार मिला हैं मुझे काम नहीं मिल रहा। मुझे अपने परिवार के पालन पोषण के लिए चींटियों के अंडे खाने पड़ रहे है। मैं यह पुरस्कार राष्ट्रपति को लौटाना चाहता हूं।

आपको बता दें कि ये किसान हैं ओडिशा के किसान दैतारी नायक, जिन्हें पद्श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दैतारी नायक ने कहा, ''पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद भी मेरी स्थिति जस की तस है। पहले मुझे हर दिन काम मिल जाता था लेकिन अब लोग मुझे काम भी नहीं देते हैं। लोग सोचते हैं कि रोजाना का काम मेरी हैसियत से कम है। हमारी स्थिति यह हो गई है कि अब मुझे चींटी के अंडे खाकर गुजारा करना पड़ रहा है।

दैतारी नायक ने कहा, ''अब मैं तेंदू पत्ता और आम का पापड़ बेचकर अपना घर चला रहा हूं। पद्मश्री अवॉर्ड की कोई कीमत नहीं है मेरे लिए। मैं यह पुरस्कार लौटाना चाहता हूं जिससे की मुझे कुछ काम मिल जाए।''

बता दें कि दैतारी नायक को यह अवॉर्ड नहर खोदने के लिए रामनाथ कोविंद ने दिया था। जिसका वज़ह वो नहर का रास्ता था, जो तीन किलोमीटर पहाड़ को काटकर बनाया गया था। नहर बनने के बाद आसपास के जमीन काफी उपजाऊ बन गए थे।

नायक ने कहा कि मुझे अपना परिवार चलाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुझे सरकार की ओर से मात्र 700 रुपये प्रति महीना पेंशन मिलता है। परिवार चलाने में हो रही परेशानियों को लेकर नायक ने अवॉर्ड में मिले मेडल को वहां टांग दिया जहां बकरियां बांधते हैं।

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