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डॉक्टरी विवाद के बाद अब ममता ने छेड़ा भाषा राग, कहा बंगाल में बांग्ला भाषा बोलना जरूरी

नोएडा : लोकसभा चुनाव के बाद ममता सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिसने पश्चिम बंगाल में एक बार फिर अशांत का माहौल छेड़ दिया। इससे पहले बंगाल में अशांत का माहौल लेफ्ट शासन के दौरान था, जिससे लड़कर ममता ने बंगाल में अपना शासन कायम किया था। लेकिन जिस शांति का राग छेड़कर ममता ने यह शासन हासिल किया था, वह उसे खुद अशांत करने में लगी हुई है। जिसमें प्रमुख चुनाव के दौरान उत्पन्न हिंसा, बीजेपी एवं टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या, डॉक्टरों का उग्र प्रदर्शन और अब ये भाषा राग। जिसका कहीं न कहीं संबंध ममता बनर्जी से है। जो अपने तानाशाह रवैये से पश्चिम बंगाल को अशांत किये हुए है।

एप्रेस को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि अगर आपको बंगाल में रहना है तो बांग्ला भाषा बोलनी होगी, जिसका कारण उन्होंने बांग्ला भाषा को आगे लाने को बताया। लेकिन अगर हम इसके दूसरे पहलू पर नज़र डाले तो पश्चिम बंगाल में शायद बंगालियों के बाद अगर सबसे अधिक जनसंख्या वाला कोई संख्या होगा तो शायद वह यूपी और बिहार का होगा, जो यहां रह रहें है। यहां कुछ ऐसे भी लोग है जो जीवन यापन करने के लिए बंगाल जाते है और ममता अपने इस घोषणा से उन सभी को अपने राज्य से अलग-थलग करना चाहती है जिससे वो अपना बांग्ला राज चला सकें।

उन्होंने कहा कि, '' जब मैं बिहार, यूपी, पंजाब जाती हूं तो मैं उनकी भाषा बोलती हूं। अगर आप बंगाल में हैं तो आपको बांग्ला बोलना होगा।'' अब अगर हम इस भाषण को स्पष्ट समझने की कोशिश करते हैं तो ममता एक नेता हैं जो अपने राज्य और पार्टी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्हें अपने पार्टी के प्रसार के लिए या आम नागरिकों को खुद से जोड़ने के लिए उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के भाषा का प्रयोग करना होगा।

 

ममता ने आगे कहा, '' मैं उन अपराधियों को बर्दाश्त नहीं करूंगी जो बंगाल में रहते हैं और बाइक पर घूमते हैं।''  जहां उनका निशाना बीजेपी के वे कार्यकर्ता थें जो अक्सर ममता के रैलियों के सामने जयश्री राम का नारा लगाते हैं या किसी भी कार्यक्रम के लिए बाइक का जुलुस निकालते है।  

जूनियर डॉक्टर्स के प्रदर्शन पर ममता ने कहा, ''अस्पताल से जुड़े प्रदर्शनों में बाहरी लोग शामिल हैं।'' यानी ममता ने इस विरोध प्रदर्शन को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन अस्पताल के डॉक्टर नहीं बल्कि बाहरी शख्स कर रहें है, जिसका ठीकरा उन्होंने बीजेपी के सिर पर फोड़ा था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर्स के विरोध प्रदर्शन के बाद पूरे देश में इसका व्यापक असर हुआ, जिसमें देश के अन्य राज्यों के डॉक्टर भी शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान NRS कॉलेज के 150 से अधिक डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी ममता सरकार की जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट की तरफ से ममता सरकार को आदेश दिया गया है कि वह तुरंत नाराज डॉक्टरों से बात करें और ये भी बताएं कि अभी तक डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

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