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लोकसभा चुनाव की तारीखों पर विवाद, मुस्लिम नेताओं ने जताया विरोध

नई दिल्ली: पिछले काफी दिनों से जारी चर्चाओं के बीच रविवार को चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया। आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान किए जाने के बाद एक ओर राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी है, वहीं दूसरी तरफ चुवानी तारीखों को लेकर विवाद भी शुरू हो चुका है।

दरअसल, आयोग द्वार घोषित की गई तारीखों को अगर विस्तार से समझते हैं तो तीन राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में पड़ रही हैं। जिसके कारण कुल मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए तारीखों में बदलाव की मांग की है।

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चुनावी तारीखों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता व कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है, हम उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि, हम आयोग के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन सात फेज में होने वाले चुनाव बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कठिन होंगे।

उन्होंने कहा कि, इन चुनावों में सबसे ज्यादा परेशानी मुस्लिमों को होगी, क्योंकि वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में रखी गई हैं। फरहाद ने गंभीर आरोप लगाता हुए यहां तक कहा कि यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों की संख्या अधिक है और बीजेपी नहीं चाहती है कि अल्पसंख्यक अपना वोट डाल पाएं, लेकिन हम इससे परेशान नहीं हैं, क्योंकि अब लोग बीजेपी हटाओ-देश बचाओ को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

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वहीं चुनावी तारीखों पर आपत्ति जताते हुए लखनऊ ईदगाह के इमाम और शहरकाजी मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने आयोग से आग्रह किया है कि इन तारीखों को रमजान से पहले या ईद के बाद रखा जाए। जबकि चुनावी तारीखों पर आपत्ति को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, अगर किसी को तारीखों पर आपत्ति है तो वह चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

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