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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को वापस लेना पड़ा ये बड़ा फैसला!

भोपाल: हाल ही में मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता में आने के बाद राज्य में सालों से जारी एक परंपरा को खत्म करने की कोशिश की जिसपर भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता समेत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद अब आखिरकार कमलनाथ को पीछे हटना पड़ा है।

आपको बता दें कि ये पूरा विवावद राष्ट्रगीत वंदे मातरम से जुड़ा है। मध्य प्रदेश में हर महीने की पहली तारीख को मंत्रालय के सामने स्थित पार्क में अधिकारी-कर्मचारी वंदे मातरम गायन कार्यक्रम में शामिल होते थे और इसके बाद ही काम शुरू होता था। इस परंपरा को मध्य प्रदेश के ममुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने शुरू किया था, लेकिन कांग्रेस की सत्ता आने के बाद नए साल की पहली तारीख पर ये आयोजन नहीं हुआ।

जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया लगाते हुए प्रदेश मे विरोध प्रदर्शन किया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि वह सात जनवरी को प्रदेश के सभी 109 भाजपा विधायकों के साथ मध्य प्रदेश सचिवालय के बाहर वंदे मातरम गाएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को राष्ट्रगीत के शब्द नहीं आते, या वंदे मातरम गाने में शर्म आती है तो मुझे बता दें! मैं हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम गाऊंगा। मामले पर पिछले दो दिनों से जारी विवादों के बीच अब राज्य के नये मुख्यमंत्री ने कमलनाथ ने पलटी मार ली है। उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया है।

हालांकि नये मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को नये तरीके से मनाने की बात की है। कांग्रेस की सत्ता आने के बाद अब हर महीने के पहले दिन सुबह 10.45 बजे पुलिस बैंड की धुन पर राष्ट्रगीत गाया जाएगा। वहीं इस दिन सभी सरकारी कर्मचारी शौर्य स्मारक से वल्लभ भवन तक मार्च भी करेंगे। इतना ही नहीं इस आयोजन में आम लोगों को भी जोड़ा जाएगा। इस संबंध में सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं।

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