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‘सुप्रीम’ फटकार के बाद भी नहीं मानी पुलिस, पत्रकार को पिलाया पेशाब!

नोएडा: दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में इन दिनों जो भी चल रहा है, उसे लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या कहेंगे? देश भर में पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसक घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट कई बार फटकार लगा चुका है, लेकिन राज्य और केंद्र सरकारों की बंद आंख खुलने का नाम नहीं ले रही। आइए देखिए आखिर क्या है पूरा मामला...

ये तस्वीरें अपराधियों के सामने सरेंडर कर चुकी यूपी पुलिस की है, जिसके लंबे हाथ खुंखार अपराधियों के सामने बैने पड़ गए है। यूपी पुलिस को ये मंजूर नहीं कि पत्रकार उनकी नाकामियां जगजाहिर करे, अगर किसी पत्रकार ने ऐसी जुर्रत की भी तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

ताजा मामला शामली है जहां एक निजी न्यूज चैनल के स्ट्रिंगर को जीआरपी ने जमकर पीटा, न सिर्फ पीटा बल्कि उसे मां-बहन की गालियां देते हुए सारी हदे पार कर दी। थाने बंद पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि उसने कोई खबर बनाई थी, जिससे पुलिस नाराज थी, जिसके कार उसकी पिटाई की गई है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी ये शामली की ये घटना ऐसे समय में घटी है जब देश की बड़ी अदालत ने चंद घंटे पहले ही पत्रकारों पर जुल्म पर यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

शामली से पहले योगी की पुलिस ने प्रशांत कनौजिया नाम के एक स्वतंत्र पत्रकार को सिर्फ इसलिए जेल में डाल दिया, क्योंकि उसने सीएम योगी के लिए सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किये थे, इस पोस्ट से यूपी पुलिस की बेचैनी इतनी बढ़ गई कि बिना देरी किए पत्रकार को धर दबोचा।

यूपी पुलिस के इस बर्बर रवैसे से परेशान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मामला चाहे जो भी हो किसी की आजादी कैद करने का अधिकार नहीं दे सकते है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, अगर मामला गलत है तो कानून कार्रवाई करिए, लेकिन पहले पत्रकार को जेल से रिहा किजिए।

लेकिन बड़ी अदालत से फटकार खाए पुलिस को अभी घंटे ही बीते थे कि पुलिस ने कोर्ट का बदला अमित शर्मा नाम के एक पत्रकार से ले लिया, जो डीरेल हुई मालगाड़ी को रिपोर्टिंग करने पहुंचा था। लेकिन जीआरपी को ये नगावार गुजरी। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि पुलिस ने उसका कैमरा तोड़ दिया, फोन छिन लिया। उसके साथ मारपीट की और उसे पेशाब भी पिलाया।

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