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आखिर राम रहीम के सामने नतमस्तक क्यों है सरकार?

नई दिल्ली: बलात्कारी बाबा राम रहीम के सामने सरकार का पूरी सिस्टम नतमस्तक है, तो इसमें नया क्या? राम रहीम का रसूख तो काफी पहले से सरकार और सिस्टम पर हावी रहा है। ये और बात है कि उसके काले करतूतों की पोल खुलने के बाद भगवान की तरह पूजने वाले भक्तों का भी मोह भंग हो चुका है। लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार के दिलों  में पाखंडी बाबा के लिए आज भी काफी सम्मान बचा है। जिसकी बानगी है, उसके पैरोल की वकालत करना। और हो भी क्यों न जब आगामी विधानसभा चुनाव सिर पर है और खट्टर सरकार बाबा को पैरोल दिलाकर वोटों का प्रसाद पाना चाहती है।

ये कहानी है बलात्कारी बाबा राम रहीम की, जिन्हें कभी मीडिया, सोशल मीडिया और फिल्म जगत में सुपर स्टाइलस बाबा कहा जाता था। बॉलीवुड में बादशाहत भले ही हीरो-हीरोइन की रही हो लेकिन जब भी बलात्कारी बाबा कोई फिल्म रिलीज करता, तो उसे बॉक्स ऑफिस पर हिट होने की गांरटी होती थी और हो भी क्यों न जब डायरेक्टर, प्रोड्यूसर लेकर एक्टर और लोगों को सिनेमाघरों तक खींच कर लेजाने वला फाइनेंसर भी खुद राम रहीम ही हो।

लेकिन हत्या और रेप के मामले में उलझने के बाद राम रहीम की दुनिया बड़ी तेजी से बदली। राम रहीम दो बलात्कार और एक पत्रकार की हत्या का दोषी है, जो फिलहाल रोहतक के सुनारिया जेल में बंद है। लेकिन याद कीजिए वो दिन, जब राम रहीम को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया था। उसे जेल की सलाखों तक ले जाने में हरियाणा सरकार की हवा निकल गई थी। कोर्ट से लेकर जेल तक, जंग का मौदान बना था, लेकिन लगता है सरकार उस मंजर को भूल गई है, क्या उसे ऐसी चिंता नहीं होती की अगर गुंडों का सरदार आजादी की सांस लेता हैं तो उसे फिर से कैद करना टेड़ी खीर साबित हो सकता है।

ऐसी सरकार और सिस्टम पर शर्म नहीं तो क्या आनी चाहिए? जो बेटियों के बलात्कार पर चुप्पी साधे रहती है और बलात्कारी को आम मुजरिम मानकर उनके अधिकारों का बखान करती है। सरकार कहती है अगर अन्य कैदियों को पैरोल दी जा सकती है तो राम रहीम को क्यों नहीं? सरकारी कर्मचारी राम रहीम के सभ्य और शालिन आचारण का हवाला देते हुए पैरोल की वकालत करता है। इससे बड़ा कलयुग का उदाहरण क्या हो सकता जब बलात्कारी के आचरण का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है।

हालांकि राम रहीम के पैरोल पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, वहीं अब विरोधी सुर भी लय पकड़ने लगे हैं।  एक ओर राम रहीम के गुंडों के हाथों अपने पिता को खो चुके पत्रकार छत्रपति का बेटा पैरोल का विरोध करते हुए अपनी जान को खतरा बता रहा है तो दूसरी ओर एक ब़ड़ा झोल है कि राम रहीम खेती-बाड़ी के आड़ में पैरौल की मांग कर रहा है लेकिन हकीकत है कि उसके नाम पर न तो कोई खेत है और न ही कोई बाड़ी।

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