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राजस्थान: कैसे रातों-रात 'मियां का बाड़ा' बन गया महेश नगर, 15 गांवों के भी बदले नाम

जयपुर: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय किये जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब राजस्थान में एकसाथ 15 गाँव के नाम बदले जा रहे हैं।

बतादें कि राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की सिफारिश पर भारत सरकार ने राज्य के ऐसे 15 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की है जोकि हिन्दू बाहुल्य हैं पर उनका नाम मुस्लिम नामों पर पड़ा था। राजस्व विभाग गांव के नए नामों का गजट प्रकाशित कर दिया है। जिसके बाद इसका खुलासा हुआ है। हालाँकि कहा जा रहा है की नाम बदले के लिए ग्राम पंचायत की ही ओर से निवेदन किया गया था जिसके बाद इसे पूरा किया जा रहा है। सबसे पहले उस गाँव से परिचय करवाते हैं जिसका नाम 'मियां का बाड़ा' से बदलकर महेश नगर किया गया है। यह राजस्थान के बाडमेर का 'मियां का बाड़ा' नाम का गाँव है।

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जिसे अब महेश नगर कर कर दिया गया है। गांव के लोगों का कहना है कि उनकी सभा ने कई साल पहले गाँव का नाम बदलने के लिए अर्जी लगाई थी। जोकि अब पूरी हुई है। लोगों ने कहा कि इस गाँव का नाम 'मियां का बाड़ा' मुस्लिम शासकों ने किया था। आगे लोगों ने कहा कि 'मियां' शब्द मुस्लिम लोगों के लिए प्रयोग होता है और बाड़ा मतलब रहने की जगह होती है ऐसे में ऐसा प्रतीत होता था कि ये मुस्लिमों का गांव है। जबकि यहाँ मुस्लिम समुदाय के महज 21 लोग रहते हैं। वहीँ इस बारे में गांव के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह ने एक मीडिया से बात करते हुए कहा कि, दस साल पहले हमने मारवाड़ राजघराने से दस्तावेज निकालकर राजस्थान सरकार को पेश किया था मगर खुशी है कि अब जाकर हमारी यह मांग पूरी हुई है।

इन गाँव के बदले नाम

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अजमेर जिले के सलेमाबाद को 'श्री निंबार्क तीर्थ', झूंझनू के 'दो इस्माईलपुर' को बदल कर एक का 'पिचनवा खुर्द' व 'दूसरे इस्माईलपुर' का नाम 'कौशलनगर', चित्तौडगढ़ जिले के 'मंडफिया गांव' का नाम 'सांवलिया सेठ' किया गया जोकि सांवलिया सेठ के विशाल मन्दिर और तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही चित्तौड़ के 'मोहम्मदपुरा' का नाम 'मेडी का खेड़ा', 'नवाबपुरा' का नाम 'नईसरथल', 'रामपुर-आजमपुर' का 'सीताराम जी का खेड़ा' जालौर के 'नरपाड़ा' का नाम 'नरपुरा', 'मेडा ब्राह्मन' का नाम 'मेडा पुरोहितान', नवलगढ़ के 'डेवा की ढाणी' का नाम 'गिरधारीपुरा' किया गया है। फिलहाल नाम बदलने की प्रक्रिया लम्बे समय से चल रही थी, लेकिन चुनाव से ठीक पहले हिन्दू बाहुल्य क्षेत्रों के मुस्लिम नामों को बदलना चुनावी मकसद भी मालूम पड़ता है।

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