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राजनीति का निराला खेल: कहीं बाप का मुकाबला बेटी से, तो कहीं आमने-सामने हैं चाचा-भतीजा

नई दिल्ली: आम चुनाव 2019 के तहत गुरुवार को पहले चरण में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 91 सीट के लिए वोटिंग कराई जा रही है। इस साल का आम चुनाव कई मायने में खास है। दरअसल, भारतीय राजनीति में वंशवाद एक ऐसी ‘बीमारी’ है जिससे जद में तमाम राजनीतिक पार्टियां है, हालांकि इसके बाद भी वंशवाद को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान की स्थिति रही है।

इस बार आम चुनाव में कई ऐसे परिवार हैं जिनके सदस्य एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। कहीं बाप-बेटी एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं, तो कहीं चाचा-भतीजे के बीच जंग छिड़ी है। ऐसे में यह देखना बेहद ही दिलचस्प होगा की पारिवारिक सियासत की बाजी कौन मारता है? पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट...

बाप-बेटी के बीच मुकाबला

आंध्र प्रदेश के अराकू लोकसभा सीट पर पहले चरण में वोटिंग हो रही है। यहां बाप और बेटी एक दूसरे के खिलाफ चुनावी रण में उतरे हैं। खास बात है कि इन दोनों बाप-बेटी को दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने प्रत्याशी बनाया है। बता दें कि छह बार सांसद चुने गए विरीचेरला किशोर चंद्र सूर्यनारायण देव को टीडीपी उम्मीदवार बनाया तो उनकी बेटी वी. श्रुति देवी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। ये दोनों बाप-बेटी कुरुपम गांव के जनजातीय राजसी घराने से ताल्लुक रखते हैं। आपको बता दें कि इस सीट पर 1980 से अब तक कांग्रेस और टीडीपी के बीच मुकाबला होता रहा है। इस सीट पर पांच बार टीडीपी को जीत मिली है, जबकि पांच बार कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार की जीत हुई है, और इस बार भी दोनों के बीच कांटे की टक्कर की उम्मीद दिख रही है।

चाचा-भतीजे की बीच सियासी जंग

आंध्र प्रदेश में बाप-बेटी के बीच सियासी जंग चल रही है, तो इधर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद सीट से चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं। यहां समाजवादी पार्टी से अलग हुए शिवपाल यादव अपनी खुद की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। जिनके खिलाफ उनका भतीजा अक्षय यादव समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव ल़ड़ रहे हैं। अक्षय यादव प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे हैं। फिरोजाबाद से मैजूदा सांसद अक्षय इस बार अपने ही चाचा के खिलाफ ताल ठोक रहा है। क्योंकि यहां अक्षय और शिवपाल के बीच मुकाबला है, लिहाजा बेहद ही दिलचस्प लड़ाई की उम्मीद दिख रही है। बता दें कि फिरोजाबाद में 15 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है, जिनके एकजुट वोट निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

मौसेरे भाई के बीच सियासी लड़ाई

वहीं राजस्थान के बीकानेर लोकसभा सीट से मौसेरे भाई के बीच मुकाबला है। यहां से मदनगोपाल मेघवाल कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी मदनगोपाल ने दिसंबर में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपने पद से इस्तीफा देकर रादजीति में आने का फैसला किया था। जिसके बाद उन्हें कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है।

मदनगोपाल मेघवाल का मुकबला अर्जुन राम मेघवाल से है, जो इस सीट से तीसरी बार किस्मत आजमा रहे हैं। अर्जुनराम भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है, जिन्होंने साल 2019 में राजनीति में आने का फैसला किया है। बीकानेर सीट से भाजपा और कांग्रेस की ओर से दावेदारी पेश कर रहे दोनों उम्मीदवार मौसेरे भाई हैं जिनके बीच कांटे की टक्कर की उम्मीद दिख रही है।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर जाट और ब्राह्मण मतदाता की संख्या काफी अधिक है। खास बात है कि क्षेत्र के मतदाताओं का रुख बदला-बदला सा दिख रहा है, ऐसे में देखना होगा कि दोनों भाइयों में से कौन मतदाता की पहली पसंद बनते हैं।

सगे भाइयों के बीच टक्कर

तमिलनाडु के अंडिपट्टी उपचुनाव में दो सगे भाइयों के बीच टक्कर है। यहां ए. महाराजन को द्रमुक ने टिकट दिया है। पार्टी के कद्दावर नेताओं में से एक ए. महाराजन लंबे समय से द्रमुक के साथ जुड़े रहे हैं। जिनका मुकाबला अन्नाद्रमुक उम्मीदवार ए. लोगिराजन से है। लोगिराजन, महाराजन के छोटे भाई हैं। जिनका मानना है कि राजनीति व पारिवारिक संबंध अलग-अलग हैं। हम भाईयों के बीच अच्छे संबंध हैं, हमरा परिवार लंबे समय साथ रहा है।

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