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अनोखी मिसाल, कुर्बानी के दिन भी नहीं दी कुर्बानी कहा भोलेनाथ की पूजा...

नोएडा : कुर्बानी के दिन भी कुर्बानी नहीं देना यानी कुर्बानी को टाल देने का सामर्थ्य अगर कहीं हैं तो वे भारत की भूमि पर है। जहां लोग एक दूसरे के धर्म का लिहाज करते हुए अपने पर्व के कुछ विधियों को टाल देते है, जिससे उन्हें ठेस नहीं पहुंचे। इसी सिलसिले में बिहार के मुजफ्फरपुर के छाता चौक के मुस्लिमों ने भी यहीं मिसाल पेश किया। जहां उन्होंने कुर्बानी के दिन को टालते हुए उसे आगे के दो दिनों के लिए टाल दिया। उनका कहना हैं कि 12 अगस्त को ही हिन्दुओं के पावन मास सावन का आखिरी सोमवारी हैं, जिस दिन श्रद्धालु भोले बाबा को जल चढ़ाते है। बता दें कि भगवान भोले का एक प्रसिद्ध मंदिर छाता चौक से सटे है, जो गरीबनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।  

 

छाता बाजार मस्जिद के इमाम मौलाना सईदुज्जमां ने कहा, “यहां आसपास करीब 25 से 30 मुस्लिम परिवारों के लोग रहते हैं। इनमें से अधिकांश परिवारों ने यहां कुबार्नी के लिए बकरा पहले से खरीद रखा है, लेकिन अब बकरीद की कुबार्नी सोमवार की जगह मंगलवार को की जाएगी।

मौलाना ने कहा कि, "मुस्लिम परिवार वालों के कुबार्नी देने के बाद मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता, इस कारण यह फैसला लिया गया। यह फैसला भाईचारा और सामाजिक सौहार्द के लिए सबकी रजामंदी से लिया गया है।"

उन्होंने कहा कि बकरीद के अवसर पर तीन दिनों तक कुबार्नी दी जा सकती है, इसलिए किसी को कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।

वहीं मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष दिलशाद अहमद का भी मानना हैं कि इस फैसले से समाज में अमन चैन का संदेश गया है। जिसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को बकरीद की नमाज अपने पूर्व निर्धारित समय पर अदा की गई।

उल्लेखनीय है कि सावन में प्रतिदिन बड़े तादाद में श्रद्धालु गरीबनाथ मंदिर पंहुचते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के सोमवार को मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। यहां बड़ी संख्या में कांवड़िये भी पहुंचते हैं और भगवान भोले का जलाभिषेक करते हैं।

माना जा रहा है कि यह पहला अवसर है जब बकरीद और सावन महीने का सोमवार एक ही दिन पड़ा हो।

बहरहाल, मुस्लिम परिवारों के इस निर्णय को सिर आंखों पर लिया जा रहा है।

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