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95 वर्ष की उम्र में रोजाना आकर गौ सेवा कर रहे है दलीप सैनी

TOHANA:- दिल में अगर समाजसेवा के प्रति जज्बा हो तो कोई भी काम मुश्किल नही होता ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सैनी मौहल्ला निवासी 95 वर्षीय दलीप सैनी ने। जो गौ सेवा के लिए रोजाना सुबह 5 बजे उठकर नंदीशाला पंहुच जाते है। जिस समय युवा भी रजाई में दुबके रहते है, उसी समय लगभग 95 वर्षीय दलीप सैनी रोजाना कैंची चौक पर बनी नंदीशाला में पंहुचकर गायो की सेवा करने का कार्य शुरू कर देते है।

दलीप सैनी का घर नंदीशाला से लगभग एक किलोमीटर दूर है लेकिन इस उम्र में भी वे पैदल नंदीशाला पंहुचकर सेवा करते है। दलीप सैनी के 4 बेटे और 4 बेटियां है सभी विवाहित होने के साथ- साथ अपने अपने परिवार के साथ सुखमय जीवन यापन कर रहे है। परिवारिक जिम्मेवारियो को पूरा करने के बाद दलीप सैनी रोजाना गाय की सेवा कर रहे है। सुबह पांच बजे नंदीशाला पंहुचने के बाद से ही वे कार्य शुरू कर देते है। नंदीशाला में मौजूद सभी गायों को पानी, चारे की व्यवस्था के बाद दूध निकलवाने का कार्य करते है। रोजाना 200 लीटर के लगभग दूध को वे आने वाले उपभोक्ताओ को देते है ताकि नंदीशाला की आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहे और आत्मनिर्भर बन जाए।

इस बारे में दलीप सैनी ने कहा कि उनकी उम्र 95 साल है तथा वे रोजाना सुबह पांच से सांय 7 बजे तक यहां सेवा कार्य करते है। उन्होने कहा कि वे सुबह आने के बाद गायो को चारा खिलाते व पानी पिलाते है। उसके बाद दूध लेने के लिए आने वालो को दूध देते है। सैनी ने बताया कि इस नंदीशाला में कार्य के लिए उन्हे सुभाष बराला, जिला अतिरिक्त उपायुक्त फतेहाबाद, पूर्व सीपीएस कमल गुप्ता, पशुपालन विभाग के अधिकारी सहित अनेक लोग सम्मानित कर चुके है। उन्होने कहा कि वे सेवा के लिए महज यहां आते है सेवा करने के बाद घर चलते जाते है।

इस बारे में नंदीशाला के सयोंजक धर्मपाल सैनी ने बताया कि लगभग चार वर्ष पूर्व शहर में बढ रहे आवारा सांडो के आतंक से रोजाना कई लोग अपनी जान से हाथ धो रहे थे जिसके बाद उस समय में टोहाना के उपमंडलाधीश डा जेके आभीर ने शहर की संस्थाओ से बात कर इस समस्या का हल निकालने की बात कही थी तो उस समय उनकी समिति ने पंचायती जमीन पर नंदीशाला खोलने का प्रस्ताव रखा जिस प्रस्ताव को मानते हुए नंदीशाला का प्लान तैयार करते हुए सभी सांडो को नंदीशाला में कर दिया। शहर से लगभग दो हजार के करीब आवारा सांड व 600 से अधिक गायों को नंदीशाला में रखा गया है। जिनमें दूध देने वाली गायों का दूध निकालकर उससे नंदियो के खाने की व्यवस्था की जाती है।

धर्मपाल सैनी ने बताया कि सबसे कम बजट की नदींशाला होने के चलते प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल इस नंदीशाला की तारीफ कर चुके है जिसके बाद से पूरे प्रदेश में अनेक जिलो मे टोहाना नदींशाला की तर्ज पर नंदीशाला खुलनी शुरू हो चुकी है। उन्होने कहा कि नंदीशाला की कार्यप्रणाली को देखने के लिए पूर्व सीपीएस कमल गुप्ता, विधायक सुभाष बराला, अतिरिक्त जिला उपायुक्त जेके आभीर, पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सहित अनेक कर्मी आ चुके है। 

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