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अपर कास्ट से ‘आरक्षण मजाक’ कर रही है सरकार, इस बिल को पास भी नहीं करवा सकती!

नई दिल्ली: साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल के पहले ही कैबिनेट बैठक में एक ऐसा फैसला किया, जिसनें राजनीतिक महकमें में हंगामा खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार सरकार ने सवर्ण यानी अपर कास्ट को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के प्रताव को मंजूरी दे दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सारकार के प्रस्ताव में आर्थिक आधार अपर कास्ट की सभी जातियों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। अगर वाकई सरकरा के ये पैसला अमल में आता है तो राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, बनिया समेत अन्य लगभग सभी जाति के लोग भी आरक्षण का लाभ ले सकेंगे।

हालांकि कांग्रेस पार्टी की माने तो सरकार ये फैसला जनते से मजाक है। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता केटीएस तुलसी ने कहा कि, जनता को बेवकूफ बनाने का काम किया जा रहा है, इस बिल को ये पास भी नहीं करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई साधारण बिल पास नहीं हो पा रहा तो फिर ये बिल कैसे पास हो पाएगा? यानी विपक्ष ने विरोध के साफ संकेत दे दिए हैं।

इसके अलावा गुजरात में पाटीदारों की लिए आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे युवा नेता हार्दिक पटेल ने सवालिया लहजे में कहा कि, क्या ये सिर्फ एक चुनावी जुमला ही तो नहीं है? उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से संसद चल रही थी ऐसे में आखिरी दिनों में इस प्रकार का फैसला करना, ये सिर्फ एक सरकार का नया नाटक है।

जानकारी के अनुसार, आर्थिक रूप से पिछड़े इन वर्गों के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए सरकार अनुच्छेद 15 एवं 16 में स्पेशल क्लॉज जोड़कर संवैधानिक संशोधन करेगी। जो संसद के रास्ते ही संभव है, लेकिन सरकार ये फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि शीतकालीन सत्र अब समापन की ओर है, ऐसे में इस संत्र में बिल के भविष्य पर कोई फैसला संभव नहीं दिखा रहा है।

वहीं आगामी लोकसभा चुनाव की चर्चाओं को देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार इसी मुद्दे के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है, कि अगली बार सत्ता में आने के बाद अपर कास्ट को भी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा? वैसे सरकार के पास और कई रास्ते हैं जिसकी मदद से अपर कास्ट के लिए आरक्षण राह आसान हो सकती है, लेकिन उन फैसलों के लिए अभी थोड़ा इंतजार और करना होगा।

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