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हाईकोर्ट से केजरिवाल को जोर का झटका

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को निचली अदालत की फैसले को बदलते हुए दिल्ली सरकार और केजरिवाल को जोर का झटका दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को कहा कि वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर मारे गए छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को अपने पास रख सकता है।

आप को बता दे कि दिल्ली सचिवालय पर यह छापा 15 दिसंबर, 2015 को मारा गया था। निचली अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वह छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को दिल्ली सरकार को लौटा दे। इसके खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी। उच्च न्यायालय ने बुधवार को निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।

न्यायमूर्ति पी.एस.तेजी ने कहा, "दस्तावेजों को अपने पास रखने की सीबीआई की दलील न्यायसंगत है।" दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अदालत से कहा कि सीबीआई छापे को राजनैतिक रंग दे रही है। सीबीआई ने राजनैतिक दबाव की वजह से अंधाधुंध तरीके से दस्तावेज जब्त कर लिए।

जबकि, सीबीआई ने कहा कि राजेंद्र कुमार के दफ्तर से जब्त दस्तावेज "प्रथमदृष्टया आरोपी लोगों के आपराधिक षडयंत्र और पद के दुरुपयोग को दिखा रहे हैं।" सीबीआई ने कहा कि छापे के दौरान विधिसंगत प्रक्रिया अपनाई गई थी। सीबीआई ने कहा कि छापा किसी राजनैतिक दल के दबाव में नहीं मारा गया और "आप सरकार इसे जो रंग दे रही है वह सही नहीं है।" सीबीआई ने कहा कि उसने राजेंद्र कुमार से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले की जांच के सिलसिले में छापा मारा था।

छापे के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा था कि उनके दफ्तर पर भी छापा मारा गया। उन्होंने इसका संबंध दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के भ्रष्टाचार के उस मामले की जांच से जोड़ा था जो कथित रूप से अरुण जेटली के डीडीसीए अध्यक्ष रहने के कार्यकाल में हुआ था। सीबीआई ने केजरीवाल के दफ्तर पर छापा मारने के आरोप को गलत बताया था।

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