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आँखों में नूर नहीं लेकिन, मन में रोशनी फैलाने की चाह

बोकारो: आँखों में नूर नहीं लेकिन मन में रोशनी फैलाने की चाह लिए झारखंड की एक स्कूल टीचर ने अपनी घोर लगन से लगभग 1000 पन्नों में कुरान को ब्रेल मे लिखा है।  

बोकारो के एक स्कूल में बच्चों को हिंदी पढ़ाने वाली नफ़ीस तरीन ने लगभग 3 साल में यह कारनामा कर दिखाया है। जानकार बताते है ऐसा किसी दिव्यांग ने पहली वार किया है। इससे कई दिव्यांग लोगों को कुरान पढ़ने की चाह पुरी हो सकेगी।

स्कूल में समान्य बच्चों को बेहतरीन हिंदी पढ़ाने वाली नफीस अपने जीवन में कुछ देख नही सकती है लेकिन वह चाहती है कि उन्होंने जो दिक्तें अपने जीवन में झेली है वो उनके जैसे किसी दूसरे को नही झेलना पड़े। और इनका नेत्रहीन लोगों के लिए कुरान लिखने के इस कारनामें ने इनहे आज आसमान की सैर करा रही है।

नफीस के पिता बोकारो स्टील प्लांट में काम करते है और उन्होंने अपनी बेटी को बनारस के जीवन-ज्योति विद्यालय भेजा कर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कराई। जिसके बाद नफ़ीस ने अपनी कड़ी मेहनत से बीएड किया और फिर अब वो एक सरकारी स्कूल में सामान्य बच्चों को हिंदी पढ़ाती हैं।

नफीस अपने जीवन के कुछ पलों को साझा करते हुए बताती है कि उनकी बीए की पढ़ाई के दौरान कुरान पढ़ने की इच्छा जागी लेकिन नेत्रहीन होने की वजह से उन्हे सभी ने पढ़ाने से इनकार कर दिया, और उनकी यह इच्छा टुटती इससे पहले उनको एक तस्लीम नाम हाफ़िज़ कुरान पढ़ाने को तैयार हो गए।

तस्लीम की देखरेख में नफ़ीस ने 2005 में कुरान को ब्रेल में लिखना शुरु किया और यह काम उन्होंने लगभग 3 सालों में पुरा किया। नफीस ने बताया कि इसकी गलतियां सुधारने में काफी समय लग गया। नफीस ने बताया कि वह यह काम अपने पिता, भाईयों, और हाफिज जी के कारन ही कर दिखाया है। इनके इस काम से आज पुरी दुनिया नफीस की कदम चुम रही है।

 

 

 

REPORT BY: NIRAJ SINGH

 

 

 

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