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हिंदी साहित्य की ‘गौरव’ महादेवी वर्मा की मौत के 30 साल बाद मिला टैक्स का नोटिस!

इलाहाबाद: हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा किसी पहचान की मोहताज नहीं है, उन्होंने अपनी एक बढ़ एक बेहतरिन रचनाओं के दम पर साहित्य के क्षेत्र में एक अगह ही मुकाम हाशिल किया है। लेकिन आज महादेवी वर्मा कि चर्चा किसी नए लेख या कविता को लेकर नहीं हो रही, बल्कि कानूनी नोटिस के कारण हो रही है।

दरअसल, महादेवी वर्मा के नाम हाउस टैक्स के मामले में नोटिस जारी किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महादेवी वर्मा का निधन 11 सितंबर 1987 में हो चुका है लेकिन निगम ने बिना संज्ञान में लिए महादेवी वर्मा के नाम पर हाउस टैक्स नोटिस जारी किया।

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निगम द्वारा जारी किया गया नोटिस 48 हजार रुपये का बताया जाता है, जिसपर हिंदी साहित्य से जुड़े लोगों में गुस्सा दिख रहा है। लेकिन अब उस मकान में उनके दत्तक बेटे रामजी पांडेय का परिवार रहता है। रामजी पांडेय के बड़े बेटे बृजेश पांडेय के अनुसार, साल 1997-98 में उन्होंने नगर निगम को इस बंगले को ट्रस्ट के अधीन होने की जानकारी दे दी थी। जिसके बाद गृहकर का बिल उन्हें प्राप्त ही नहीं हुआ है।

आपको बता दें कि 327/114 नेवादा इलाहाबाद के पते पर स्थित इस मकान को साल 1987 में उनकी मौत के बाद ट्रस्ट में बदल दिया गया था, लेकिन नगर निगम ने इस आवास पर अब तक 28,172 रुपये का टैक्स बकाया बताते हुए इसमें 16,644 रुपये ब्याज का भी जोड़ा दिया है। इसके साथ ही चालू वर्ष का 3234 रुपये और 25 रुपये शुल्क जोड़ा गया है।

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तो वहीं नोटिस में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि यदि 15 दिन में इस रकम का भुगतान नहीं किया गया या भुगतान न किए जाने का पर्याप्त कारण नहीं बताया गया तो व्यय सहित इस धनराशि की वसूली के लिए कुर्की वारंट भी जारी किया जाएगा।

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खबरों के अनुसार इस मसले पर स्थानीय पार्षद मुकुंद तिवारी ने कहा कि महादेवी वर्मा के योगदान को देखते हुए निगम के कमिश्नर हरिकेष चौरसिया को हाउस टैक्स रद्द करना चाहिए, तो वहीं इस पूरे मामले पर कमिश्नर के हवाले से बताया जा रहा है कि, मामले में नोटिस जारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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