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बड़ा खुलासा: “मध्यप्रदेश में व्यापम से भी बड़ा घोटाला”

भोपाल: बीजेपी सत्ताधारी राज्य मध्यप्रदेश से बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है, मामले में राज्य की सरकार पर शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही पास किए जाने के मामले को लेकर राज्य की शिवराज सरकार सवालों के घेरे में है, बता दें कि सरकार की विरोधी पार्टियां इसे घोटाले का नाम दे रही है। लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते सरकार को जांच करानी ही चाहिए।

दरअसल पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल के हवाले से मीडिया में कुछ दस्तोवज पेश किए गए, जिसके माध्यम से सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। यह मामला राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान से जुड़ा है, जहां सीनियर सेंकंडरी यानी 12वीं की परीक्षा में प्रदेश के कई परीक्षा केंद्रों द्वारा बिना परीक्षा दिए छात्रों को पास कर दिया है|

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उन्होंने दस्तावेजो से दिखाया कि तीन केन्द्रों पर 1200 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए,पर जब परिणाम घोषित हुआ तो सभी को पास कर दिया गया। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इससे साफ है कि मिली भगत कर अरबों रुपये देकर फर्जी रिजल्ट बनवाए गए है। उन्होंने कहा कि छात्रों के परीक्षा परिणाम के साथ उनके परीक्षा केंद्रों की उपस्थति पत्रक भी पेश किए गए जिसमें ये साफ पता चल रहा है उत्तीर्ण दिख रहे छात्र परीक्षा देने तक नही आए थे।

पार्टी ने प्रदेश के तीन अलग अलग शहरों में स्थित NIOS संस्थानों के छात्रों की सूची भी जारी की, जो कि परीक्षा में बैठे बिना ही पास हो गये हैं। प्राप्त दस्तावेजों में दिखता है कि एक अफ्रीकन छात्र 2015 में भिंड जिले के उमा भारती हायर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लेता है और हिंदी जैसे विषय मे 56 अंकों से साथ पास हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम गंभीर शक पैदा कर रहा है।

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उन्होंने मामले को बड़े घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में इस संस्थान के 280 केंद्र है, इसलिए य​ह घोटाला तीन केंद्रों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने इस घोटाले को व्यापम से बडा घोटाला करार देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जांच  हाई कोर्ट की निगरानी में एसआईटी गठित कर की जाएं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को कोर्ट में लेकर जाएगी और राज्य में इसके खिलाफ प्रधर्शन भी करेगी।

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