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हिंसा अब भी जारी, 3 कार्यकर्ताओं की मौत, फेंका गया बम

लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल लगातार हिंसा के आगोश में समाया हुआ है, जिस कारण हर रोज कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हो रहीं है, जो सुर्खियों में छाई हुई है। जिसमें प्रमुख टीएमसी एवं बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या, डॉक्टरी विवाद एवं ममता सरकार का तानाशाह रवैया है। ममता के इस तानाशाह रवैये के बावजूद भी हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला मुर्शिदाबाद जिले के डोमकल की है, जहां आज सुबह एक टीएमसी कार्यकर्ता के घर पर बम फेंका गया था। जिसमें कार्यकर्ता के तीन रिश्तेदारों की मौत हो गई। जिनकी पहचान टीएमसी कार्यकर्ता खैरुद्दीन शेख और सोहेल राणा के रूप में हुई है वहीं एक के नाम का पता नहीं चल सका है।

इस आत्मघाती हमले पर जिला टीएमसी नेता अबू ताहेर ने कहा है कि मारे गए तीनों मृतक टीएमसी कार्यकर्ता के रिश्तेदार हैं। मृतक परिवार की ओर से यह दावा किया गया है कि इस हमले में कांग्रेस शामिल है। इस हिंसा में मारे गए एक खैरुद्दीन शेख के बेटे ने कहा, '' हम सो रहे थे, अचानक हमारे घर पर बमबारी हुई। उन्होंने मेरे पिता को गोली मार दी। कुछ दिन पहले मेरे चाचा को भी मार दिया गया था. इस हमले के पीछे कांग्रेस है।” हालांकि  पुलिस इस घटना का जांच कर रही है और हत्यारों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

 

बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं जब हिंसा की घटना राज्य में हुई है। इस हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने बीते बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। लेकिन ममता ने इस बैठक से यह कहते हुए किनारा कर लिया कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, राज्यपाल का नहीं।

इस बैठक पर ममता ने कहा था, ''वे (राज्यपाल) बीजेपी के प्रवक्ता की तरह हैं। बीजेपी ने उन्हें सर्वदलीय बैठक कराने के लिए कहा और उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने (त्रिपाठी) मुझे भी बुलाया था। लेकिन, मैंने कहा कि मैं नहीं जा सकती क्योंकि आप राज्यपाल हैं और मैं निर्वाचित सरकार हूं। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। यह आपका विषय नहीं है।''

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