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रिपोर्ट में खुलासा: 19 विधायकों ने नहीं दी पैन की जानकारी, बीजेपी टॉप पर

भोपाल: आदर्श आचार संहिता का पालन करना भी मध्य प्रदेश के विधायकों को नागवार है, यही कारण है कि वर्तमान विधानसभा के 19 विधायकों ने पैन कार्ड का ब्यौरा देना भी लाजिमी नहीं समझा। इसके अलावा आठ विधायक तो ऐसे हैं जिन्होंने पिछले दो चुनाव में जो पैन कार्ड का ब्यौरा दिया है, वह मेल नहीं खाता है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म और इलेक्शन वॉच द्वारा 542 सांसदों और देश भर के 4,086 विधायकों के पैन कार्ड का अध्ययन करने के बाद पाया गया है कि देश में निर्वाचित सात सांसदों और 199 विधायकों ने अपने पैन कार्ड का ब्यौरा नहीं दिया हैं। वहीं, दोबारा निर्वाचित 11 सांसद और 35 विधायक ऐसे हैं, जिनके पैन कार्ड ब्यौरे में असमानता है।

पिछले दिनों 'कोबरापोस्ट' ने इस बात का खुालासा किया था कि कई विधायक और सांसदों के पैन कार्डो के अलग-अलग नंबर है, उसके बाद एडीआर और इलेक्शन वॉच ने विधायकों व सांसदों के हलफनामों का अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट तैयार की। एडीआर ने शुक्रवार को पैन कार्ड का ब्यौरा न देने वालों की जारी की गई सूची में मध्य प्रदेश के 19 विधायक शामिल हैं। इनमें भाजपा, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से नाता रखने वाले विधायक हैं। पैन कार्ड का ब्यौरा न देने वाले विधायकों में भाजपा के 12, कांग्रेस के छह और बहुजन समाज पार्टी का एक विधायक है।

बीजेपी के 12 विधायक

पुष्पेंद्र नाथ पाठक (बिजावर),

घनश्याम पिरौनिया (भांडेर),

योगेंद्र निर्मल (वारासिवनी),

रामकिशन कोटवार ( उदयपुरा),

 हजारी लाल दांगी ( खिलचीपुर ),

आशीष शर्मा (खातेगांव),

योगिता नवल बोरकर ( पंधाना),

मथुरा लाल (रतलाम ग्रामीण),

पन्ना लाल शाक्य (गुना),

कल्याण सिंह ठाकुर ( विदिशा ),

 मंगल सिंह धुर्वे (घोड़ा डोंगरी),

 वेल सिंह भूरिया (सरदारपुर ),

 कांग्रेस के छह विधायक

शकुंतला खटीक (करैरा),

 सरस्वती सिंह (चितरंगी),

विधायक फुंदेलाल माकरे ( पुष्पराजगढ़ ),

प्रताप सिंह (जबेरा ),

रमेश पटेल (बड़वानी),

काल सिंह भंवर (थांदला)

बसपा की एक विधायक

उषा चौधरी (रैगांव)

वहीं, दूसरी ओर आठ ऐसे विधायक पुन: निर्वाचित होकर सदन में पहुंचे जिनके पैन कार्ड के ब्यौरे में अंतर पाया गया है। इनमें भाजपा की पूर्व मंत्री रंजना बघेल (मनावर), राजेंद्र वर्मा (सोनकच्छ ), देवेंद्र वर्मा (खंडवा), कुंवर सिंह (धोहनी), मंत्री पारस जैन ( उज्जैन उत्तर), मंत्री अंतर सिंह आर्य (सेंधवा से), कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (चुरहट से ), उमंग सिंघार (गंधवानी) के नाम शामिल हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से जब पैन कार्ड में असमानता को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उनका एक ही पैन कार्ड है, दूसरा कोई पैन कार्ड नहीं है।

एडीआर द्वारा जारी किए गए अध्ययन के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि राज्य के कई विधायक आदर्श आचार संहिता को मानने को तैयार नहीं हैं। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद चुनाव आयोग ऐसे विधायकों पर क्या निर्णय लेता है।

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