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कच्चे तेल के दाम में 50% गिरावट, लेकिन जनता चुका रही है दोगुनी कीमत- जाने क्या है पूरा झोल…

नई दिल्ली: देश भर में इन दिनों तेल की बढ़ती कीमतो की चर्चा जोर पकड़ रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल कीमतों में गिरावट आ रही जबकि भारत में तेल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही है। दरअसल पिछले दिनों तेल कंपनियों ने एक ऐसा नियम लागू किया है जिसके तहत प्रतिदिन तेल की कीमतो में परिवर्तन होता है। इस फैसले के पीछे तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तेल की कीमतों में रोज समीक्षा होती है, जिसके बाद नई कीमत तय होती है। कुल मिलाकर इस मामले में इतना झोल दिखता है कि आम जनता के समझ से परे हो जाता है।

दरअसल अगर हम मोदी सरकार में तेल की कीमतो के लेकर बात करे तो, गौर हो कि साल 2014 के मई महीने में चुनाव के बाद केंद्र की सत्ता पर बीजेपी गठबंधन (NDA) की सकार बनी है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 107 अमेरिकी डॉलर्स यानी 6 हजार 859 रुपये प्रति बैरल थी और उस समय दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 71 रुपये 41 पैसे थी, लेकिन आज जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है, तब एक लीटर पेट्रोल की कीमत उसी कीमत की तरह है।

बता दें कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमत 54 अमेरिकी डॉलर्स यानी 3 हजार 438 रुपये प्रति बैरल बताई जा रही है, इसके बावजूद दिल्ली में पेट्रोल 70 रुपये 43 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है। ठीक इसी तरह से मई 2014 में दिल्ली में डीजल के दाम 56 रुपये 71 पैसे थे, जबकि आज डीजल 58 रुपये 80 पैसे लीटर मिल रहा है, इस सभी मामलों से एक बात तो साफ है कि मौजूदा समय में सरकार को कच्चा तेल खरीदने के लिए पहले के मुकाबले आधे पैसा ही चुकाने पड़ रहे है, यानी सरकार को तो फायदा हुआ है लेकिन इसका फायदा जनता को नहीं मिला रहा बल्कि उन्हें दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है।

सरकार के इस रवैये से परेशान देश की जनता सरकार से लगातार सवाल कर रही है, लेकिन सरकार की ओर से इस संबंध में अबतक कोई ऐसा जवाब नहीं आया है जिससे यह समझा जा सके कि सरकार जनता का ख्याल रख रही है। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ऐसा दावा किया जा रहा है कि पेट्रोलियम पदार्थों की वजह से सरकार को पिछले तीन सालो में भारी कमाई की है, लेकिन इसका जरा भी फायदा जनता को नहीं हुआ है।

आकड़ों के अनुसार पेट्रोलियम सेक्टर से सरकार को 2014-15 में 3 लाख 32 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता, जबकि 2016-17 के वित्त वर्ष में यह आकड़ा 5 लाख 24 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया जोकि GDP का 3.5 प्रतिशत है, लेकिन जनता की जेब से कल भी जबरन पैसे निकाले गए और आज भी जनता से भारी कीमत वसूल की जा रही है। यहां आप सोच रहे होंगे कि सरकार को इतनी कमाई हुई कैस?

तो इसका जवाब ये है कि अप्रैल 2014 में एक लीटर पेट्रोल पर 9 रुपये 48 पैसे की उत्पाद शुल्क लगती थी, जो आज बढ़कर 21 रुपये 48 पैसे हो गई है, इसी तरह से अप्रैल 2014 में एक लीटर डीजल पर सिर्फ 3 रुपये 65 पैसे की उत्पाद शुल्क लगती थी, जो आज बढ़कर 17 रुपये 33 पैसे की हो गई है। ऐसे में इस बात की भी जानकारी होने चाहिए कि पेट्रोल पर कमाई सिर्फ केन्द्र सरकार ही नहीं बल्कि अलग अलग राज्यों की सरकारें भी जमकर पैसे कमा रही है।

बता दें कि इन पेट्रोलियम पदार्थों पर तमाम राज्य अलग अलग वैट दर लगाती हैं, इसीलिए आपको अपने राज्यों में पेट्रोल और डीजल अलग अलग दामों पर मिलता है, दिल्ली में पेट्रोल पर 27% का VAT लगता है, जबकि मुंबई में पेट्रोल पर 47.64% का VAT लगाती है। बहरहाल मजबूर जनता करे भी तो क्या करे, सरकार जैसे चला रही है वैसे जनता चल रही है। इसका एक ही उपाय है कि जनता अपना काम-धाम छोड़कर इन नए मामले को लेकर भी प्रदर्श शुरू करे और सरकार के खिलाफ हल्ला बोल की करती रहे।

अगर आप इस जानकारी से संतुष्ट हैं तो अपनी आवाज भी सरकार तक पहुंचाए, इसके लिए आप नीच दिए गए बॉक्स में कमेंस कर सकते हैं, या फिर हमे ईमेल भी कर सकते हैं।

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