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RBI ने बढ़ा दी रेपो रेट, जनता पर पड़ेगा काफी बुरा असर

नई दिल्ली: पिछले काफी दिनों से जनता इस बात का इंतजार कर रही थी कब आरबीआई यानी भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट मं गिरावट का ऐलान करती है। लेकिन पिछले कई समीक्षाओं में आरबीआई ने न तो रेपो रेट में कटौती की और न ही बढ़ोतरी की, लेकिन अब हालिया समीक्षा के बाद आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

आपको बता दें कि आरबीआई करीब साढ़े चार साल बाद नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिसकी बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और खास कर ईंधनों की कीमतों में तेजी बताया जा रहा है। आरबीआई के इस एलान के बाद अब मुख्य नीतिगत रेपो रेट छह प्रतिशत से बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया है। जिसका असर उन सभी लोगों पर होगा जो जो बैंक से कर्ज लेना चाहते हैं।

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रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक से कर्ज लेना महंगा हो सकता है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए आवास और कार लोन या वाहन लोन की ईएमआई के साथ-साथ व्यापार कर्ज भी महंगे होने की प्रबल संभावना बन चुकी है। इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने बताया कि रेपो दर के अनुसार रिवर्स रेपो दर में भी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद अब यह कर छह प्रतिशत हो चुका है।

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वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी दर और बैंक दर को भी बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया गया हैं। आपको बता दें कि यह फैसला बैंक की छह सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से किया है। इसके साथ आपको यह भी बता दें कि रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 के लिये जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान को 7.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

जबकि साल 2018-19 की पहली छमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधित करते हुए 4.8-4.9 प्रतिशत और दूसरी छमाही के लिये 4.7 प्रतिशत किया है। जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले आखिरी बार जनवरी 2014 में रेपो दर में बढ़ोतरी की गई थी, तब इसे 7.75 प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत किया गया था।  

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यहां आपको एक और खास जानकारी दे दें कि रिजर्व बैंक के ब्याज दरों में फैसले से पहले ही कई बैंकों ने अपने लोन महंगे कर दिए हैं। इस कर्म में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक ऑफ बड़ौदा ने मंगलवार को एमसीएलआर में 0.05% की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो सात जून से लागू हो रही है, जबति इससे पहले एसबीआई, पीएनबी और आईसीआई डैसे बैंकों ने भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

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